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07-Oct-2026 04:14 PM
मुम्बई। देश के एक अग्रणी कृषि उत्पादक राज्य- महाराष्ट्र का लगभग 80 प्रतिशत भाग अभी सूखे की चपेट में फंसा हुआ है और वहां खरीफ फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
फसलों को हो रहे नुकसान का अध्ययन- आंकलन करने के लिए केन्द्र सरकार ने वहां अपना एक दल भेजने का निर्णय लिया है और इसका गठन भी कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के कुल 358 तालुकाओं में से 265 तालुकों को सूखा ग्रस्त क्षेत्र घोषित कर रखा है जहां लम्बे समय से अच्छी बारिश नहीं हुई है।
महाराष्ट्र के कृषि मंत्री का कहना है कि केन्द्रीय टीम राज्य सरकार के सहयोग से सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी और स्थिति की भयंकरता का आंकलन करेगी। इसके बाद केन्द्र के साथ राहत-पुनर्वास की सिफारिश करते हुए अपनी रिपोर्ट जमा करेगी। इसके बाद राज्य को केन्द्रीय सहायता मिलेगी जिसे प्रभावित किसानों के बीच वितरित किया जाएगा।
इससे पूर्व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने राज्य की विषम स्थिति की विस्तृत जानकारी देते हुए केन्द्र को एक रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें सरकार ने नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (एनडीआरएफ) के अंतर्गत सहायता देने का आग्रह किया गया था। इस स्थिति के बाद केन्द्र सरकार ने वहां हालात का जायजा लेने के लिए अपना एक दल भेजने का निर्णय लिया था।
महाराष्ट्र में भीषण सूखे की वजह से अनेक खरीफ फसलों को भारी क्षति होने की आशंका व्यक्त की जा रही है जिसमें अरहर (तुवर), सोयाबीन, गन्ना, कपास एवं मक्का आदि शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र इन सभी फसलों के अग्रणी उत्पादक राज्यों की सूची में शामिल है।