मेहसाणा से 2024-25 में जीरा, ईसबगोल एवं सौंफ का भारी निर्यात
01-Sep-2025 01:47 PM
अहमदाबाद। गुजरात सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य के मेहसाणा जिले से वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान 3995 करोड़ रूपये मूल्य के मसालों का शानदार निर्यात किया गया जिसमें मुख्यतः जीरा, ईसबगोल एवं सौंफ जैसे बीज दार मसाले- शामिल हैं। कुल निर्यात में 25 प्रतिशत का शिपमेंट चीन को हुआ जबकि 16 प्रतिशत मसाले बांग्ला देश को भेजे गए।
इसके अलावा संयुक्त रब अमीरात (यूएई) को 10 प्रतिशत, अमरीका को 5 प्रतिशत और मोरक्को को 4 प्रतिशत मसालों का निर्यात शिपमेंट किया गया। गुजरात इन तीनों मसालों का अग्रणी उत्पादक राज्य है।
सुगन्धित- सूखे बीज दार मसालों की मांग वैश्विक निर्यात बाजार में हमेशा बनी रहती है और उत्तरी गुजरात संभाग में इसका भरपूर उत्पादन होता है।
ये मसाले खाद्य पदार्थों का स्वाद एवं सुगंध बढ़ा देते हैं जबकि स्वास्थ्य के लिए भी हितैषी होते हैं। मेहसाणा जिले में ही विश्वविख्यात ऊंझा मंडी अवस्थित है जिसे इन मसालों का सबसे बड़ा व्यापारिक केन्द्र माना जाता है।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार ऊंझा में कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) के परिसर (थोक मंडी) में 15 फरवरी से 10 अप्रैल 2025 के बीच 54,410 टन जीरे की आवक हुई
जो वर्ष 2024 की समान अवधि की आवक 46,313 टन से 17.5 प्रतिशत अधिक रही। ऊंझा मंडी में जीरा, सौंफ, ईसबगोल एवं रापडा (मस्टर्ड सीड) सहित कुछ अन्य मसालों का भारी कारोबार होता है और समूचे देश के व्यापारी वहां से माल खरीदकर ले जाते हैं।
ऊंझा मंडी में जीरा एवं अन्य सीड मसालों के निर्यात एवं घरेलू व्यापार के क्षेत्र में 800 से अधिक फर्में सक्रिय हैं। प्राप्त सूचना के मुताबिक मेहसाणा जिले से वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान 2904 करोड़ रुपए (36.167 करोड़ डॉलर) मूल्य के जीरा एवं अन्य मसालों का निर्यात हुआ था जो वित्त वर्ष 2023-24 में 42 प्रतिशत उछलकर 4127 करोड़ रुपए (49.895 करोड़ डॉलर) पर पहुंच गया
लेकिन वित्त वर्ष 2024-25 में यह कुछ घटकर 3995 करोड़ रुपए पर आ गया। पिछले साल मौसम की हालत प्रतिकूल रहने से जीरा का उत्पादन एवं निर्यात प्रभावित हुआ था।
गुजरात में पिछले रबी सीजन के दौरान जीरा का बिजाई क्षेत्र 4.76 लाख हेक्टेयर रहा जो तीन वर्षीय औसत क्षेत्रफल से 25 प्रतिशत ज्यादा था। इसी तरह वहां सौंफ का बिजाई क्षेत्र 57 हजार हेक्टेयर एवं ईसबगोल का रकबा 27 हजार हेक्टेयर दर्ज किया गया।
