मौजूदा मूल्य स्तर पर 50 लाख टन गेहूं का निर्यात होना मुश्किल

23-Apr-2026 03:23 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने घरेलू बाजार भाव को सुधारने एवं किसानों को लाभप्रद वापसी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गेहूं का निर्यात कोटा फरवरी के 25 लाख टन से दोगुना बढ़ाकर अब 50 लाख टन नियत कर दिया है।

उद्योग-व्यापार क्षेत्र के समीक्षक इस सम्पूर्ण कोटे के निर्यात पर अलग-अलग राय रखते हैं। कुछ समीक्षकों का मानना है कि यह निर्यात कोटा हासिल होने लायक है लेकिन रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया का कहना है कि भारतीय गेहूं की क्वालिटी एवं कीमतों की गैर प्रतिस्पर्धी स्थिति को देखते हुए कम से कम वर्तमान मूल्य स्तर पर गेहूं का ज्यादा निर्यात होना मुश्किल लगता है। अन्य निर्यातक देशों का माल सस्ते दाम पर उपलब्ध है। 

फेडरेशन के अध्यक्ष के अनुसार फसल की कटाई-तैयारी के समय आंधी-तूफान, बेमौसमी वर्षा एवं ओलावृष्टि का प्रकोप रहने से गेहूं की क्वालिटी काफी हद तक खराब हो गई। दाने बदरंग एवं चमकहीन हो गए हैं।

इस गेहूं के निर्यात में कठिनाई होगी। रूस, यूक्रेन, अमरीका, कनाडा, यूरोपीय संघ एवं अर्जेन्टीना आदि का गेहूं अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर उपलब्ध है। अगर उसमें तेजी आ जाए तथा भारतीय गेहूं का भाव स्थिर या नरम रहे तो निर्यात की पैरिटी कुछ हद तक बन सकती है।

बांग्ला देश और वियतनाम सहित दक्षिण एशिया एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देश अपनी तात्कालिक जरूरत को पूरा करने के लिए भारतीय गेहूं की खरीद में तभी दिलचस्पी दिखा सकते हैं जब इसका आयात करना उसके लिए लाभदायक साबित हो।

भारत से बांग्ला देश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका एवं अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों को गेहूं का निर्यात हो सकता है क्योंकि वहां किराया भाड़ा कम बैठेगा और समय भी ज्यादा नहीं लगेगा। आगामी समय में किस तरह का परिदृश्य रहता है इस पर भारत से गेहूं का निर्यात काफी हद तक निर्भर करेगा।