मक्का का पर्याप्त स्टॉक

20-Dec-2025 11:53 AM

मक्का की घरेलू मांग एवं खपत में होने वाली बढ़ोत्तरी के अनुरूप इसकी पैदावार भी बढ़ती जा रही है जिससे इसकी कीमतों पर असर पड़ रहा है। एथनॉल निर्माण के लिए विशाल मात्रा में मक्का का उपयोग होने लगा है जबकि पॉल्ट्री उद्योग, पशु आहार एवं स्टार्च निर्माण में भी इसका अच्छा इस्तेमाल हो रहा है।

मानवीय खाद्य उद्देश्य के लिए मक्का का समुचित स्टॉक उपलब्ध रहता है लेकिन इसका निर्यात प्रदर्शन कमजोर पड़ता जा रहा है। इसका कारण कीमतों का गैर प्रतिस्पर्धी होना है।

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि नवम्बर 2024 से अक्टूबर 2025 के एथनॉल मार्केटिंग सीजन के दौरान डिस्टीलरीज द्वारा 125.75 लाख टन मक्का का उपयोग किया गया।

सीजन के दौरान मक्का पर आधारित डिस्टीलरीज को 477.80 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति का कोटा आवंटित किया गया था। 2024-25 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन में 434 लाख टन मक्का का घरेलू उत्पादन हुआ जिससे तमाम घरेलू मांग की पूर्ति आसानी से हो गई। 

2025-26 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन में मक्का का घरेलू उत्पादन बढ़कर 500 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है।

खरीफ सीजन में इसका बिजाई क्षेत्र उछलकर सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया जबकि मौजूदा रबी सीजन में भी रकबा बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

शानदार उत्पादन एवं कमजोर औद्योगिक मांग के कारण मक्का के दाम में भारी गिरावट आ गई थी जिसे देखते हुए तेलंगाना और कर्नाटक सरकार को एहतियाती कदम उठाना पड़ा लेकिन अन्य राज्यों में किसानों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। अब कीमतों में कुछ सुधार आया है मगर इसमें और वृद्धि होनी चाहिए।

किसानों में मक्का की खेती के प्रति उत्साह एवं आकर्षण बरकरार रखने के लिए उसे बेहतर वापसी सुनिश्चित करना आवश्यक है। अब मक्का में वायदा कारोबार आरंभ करने पर विचार किया जा रहा है जिससे बाजार में स्थिरता आ सकती है। भविष्य में मक्का का उत्पादन निरन्तर बढ़ाने की आवश्यकता पड़ेगी।