मक्का का उत्पादन बढ़ाना किसानों के लिए होगा बेहद लाभदायक

31-Dec-2024 08:15 PM

नई दिल्ली । विभिन्न औद्योगिक उद्देश्यों में बढ़ती मांग एवं खपत तथा कीमतों में तेजी मजबूती की प्रवृत्ति को देखते हुए भारत में मक्का का भविष्य उज्जवल नजर आ रहा है और इसका उत्पादन बढ़ाना किसानों के लिए बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।

मक्का की खेती पर लागत खर्च अपेक्षाकृत कम बैठता है जबकि इसकी नई-नई उन्नत प्रजातियों का विकास होने से उपज दर में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।

सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाकर 2225 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जबकि खरीदारों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण इसका बाजार भाव एमएसपी से ऊंचा चल रहा है। मक्का की घरेलू मांग एवं कीमत इतनी बढ़ गई है कि देश से इसका निर्यात बहुत मुश्किल हो गया है। 

उद्योग-व्यापार क्षेत्र के समीक्षकों के अनुसार आने वाले वर्षों के दौरान मक्का बाजार का तेजी से विकास-विस्तार होने की उम्मीद है क्योंकि एक तरफ उच्च उपज दर वाली किस्मों की खेती का दायरा बढ़ेगा और उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी तो दूसरी ओर इसकी औद्योगिक मांग और खासकर एथनॉल निर्माण में खपत तेजी से बढ़ेगी। इससे मक्का के मूल्य संवर्धित उत्पादों के उत्पादन में भी वृद्धि की संभावना है।

2023-24 सीजन के दौरान भारत में लगभग 356.70 लाख टन मक्का का उत्पादन हुआ। वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो भारत मक्का के बिजाई क्षेत्र की दृष्टि से चौथे तथा उत्पादन की दृष्टि से 7 वें नम्बर पर है।

हरित क्रांति के एक जनक का कहना है कि पिछला दो दशक चावल और गेहूं के क्षेत्र में क्रांति का रहा जबकि अगले कुछ दशकों तक मक्का का युग रह सकता है।

मक्का के तीन शीर्ष उत्पादक देशों में अमरीका, चीन एवं ब्राजील तथा तीन सबसे प्रमुख निर्यातक देशों में अमरीका, ब्राजील एवं अर्जेन्टीना शामिल है।

मक्का का वैश्विक कारोबार 19.70 करोड़ टन के करीब होता है और इन तीनों देशों का इस पर वर्चस्व बना हुआ है। चीन तथा मैक्सिको सहित कई अन्य देशों में बड़े पैमाने पर मक्का का आयात किया जाता है।

भारत में कभी-कभार मक्का के सीमित आयात की आवश्यकता पड़ती है लेकिन एथनॉल निर्माण में तेजी से बढ़ते उपयोग को देखते हुए इसका आयात भविष्य में बढ़ सकता है। इससे बचने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना आवश्यक होगा।