मानसून की अच्छी बारिश खरीफ फसलों के लिए आवश्यक

16-Apr-2025 12:50 PM

नई दिल्ली। पिछले साल देश में दीर्घकालीन औसत के सापेक्ष 108 प्रतिशत बारिश दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में हुई थी जिससे धान सहित अन्य खरीफ फसलों का बेहतर उत्पादन हुआ।

चालू वर्ष के दौरान मौसम विभाग ने 105 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है जो सामान्य स्तर से कुछ अधिक है। मालूम हो कि 96 से 104 प्रतिशत के बीच बारिश को सामान्य माना जाता है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में देश के सभी भागों में वर्षा का समान वितरण होना आवश्यक है क्योंकि तभी खरीफ फसलों का उत्पादन नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है। इससे महंगाई घटाने में मदद मिलेगी। 

देश में 70 प्रतिशत से अधिक वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में यानी जून से सितम्बर के दौरान होती है जिससे न केवल खरीफ फसलों को प्रत्यक्ष फायदा होता है बल्कि बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर ऊंचा होने पर रबी फसलों की सिंचाई में भी सहायता मिलती है।

खरीफ सीजन के दौरान देश में धान, तुवर, उड़द, मूंग, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, सोयाबीन, मूंगफली एवं कपास सहित कई अन्य फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इन फसलों की रोपाई / बिजाई की प्रक्रिया मानसून की पहली बौछार के साथ आरंभ हो जाती है और कमोबेश सितम्बर तक जारी रहती है। 

अक्सर दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान देश के कुछ भागों में जरूरत से ज्यादा वर्षा होने के कारण भयंकर बाढ़ आ जाती है जबकि कुछ अन्य भाग सूखा या अनावृष्टि की चपेट में फंस जाता है।

इससे खरीफ फसलों को काफी क्षति होती है। यदि सभी इलाकों में सामान्य बारिश हो तो उत्पादन में जोरदार वृद्धि हो सकती है। इस बार मानसून की अच्छी वर्षा के लिए सभी अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं और इसका आगमन भी सही समय पर होने की उम्मीद है।