मानसून की अनियमित चाल

19-Jul-2025 12:06 PM

दक्षिण-पश्चिम मानसून की चाल इस बार भी अनियमित देखी जा रही है जिससे देश में वर्षा का असमान वितरण हो रहा है और इससे खरीफ फसलों को कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे से भारी नुकसान की आशंका बनी हुई है।

जुलाई माह के दौरान देश में सर्वाधिक वर्षा होती है और अनेक इलाकों में भयंकर बाढ़ भी आती है। यह कोई अप्रत्याशित घटना नहीं है लेकिन इस बार 16 जून से मानसून की सक्रियता एवं गतिशीलता देश के खास-खास इलाकों में ज्यादा देखी जा रही है जिससे वहां हालात विषम होते जा रहे हैं।

एक-दो दशक पूर्व तक देश के पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों में अत्यन्त जोरदार बारिश होती थी जबकि पश्चिमोत्तर भाग अक्सर सूखे की चपेट में फंसा रहता था। मेघालय के चेरापूंजी में सर्वाधिक बारिश होती थी और राजस्थान का जैसलमेर जिला सबसे कम वर्षा के लिए जाना जाता था लेकिन अब परिदृश्य बदल गया है।

पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों को इस बार बारिश की कमी का सामना करना पड़ रहा है जबकि राजस्थान के कोटा, बारां, बूंदी एवं अजमेर सहित अन्य जिलों में लोगों को बाढ़ की विभीषिका का सामना करना पड़ रहा है।

मौसम विभाग का कहना है कि चालू माह के शेष दिनों के दौरान देश के अनेक राज्यों में मूसलाधार बारिश होगी क्योंकि बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दाब का मजबूत क्षेत्र बन रहा है जबकि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता भी बनी हुई है। उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र के ऊपर भी डिप्रेशन देखा जा रहा है।

दक्षिण भारत में मानसून दोबारा सक्रिय हो गया है। कहने का आशय यह है कि आगामी 10-12 दिनों के दौरान देश के विभिन्न भागों में मानसून की जोरदार बारिश का सिलसिला बरकरार रहेगा।

जिन इलाकों में पहले ही अत्यन्त भारी  बारिश हो चुकी है वहां ओर वर्षा होने पर खरीफ फसलों को गंभीर नुकसान हो सकता है लेकिन जहां कम या बहुत कम वर्षा हुई है वहां आगे पानी बरसने से न केवल खरीफ फसलों को फायदा होगा बल्कि इसकी बिजाई की रफ्तार बढ़ाने में भी किसानों को सहायता मिलेगी। 

खरीफ फसलों की बिजाई सामान्य ढंग से जारी है और आगे भी इसका सिलसिला बरकरार रहेगा। अभी बिजाई क्षेत्र का लम्बा दायरा शेष पड़ा है। पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल के सापेक्ष करीब 60 प्रतिशत भाग में फसलों की बिजाई पूरी हो सकी है।

जुलाई-अगस्त के दौरान बिजाई की रफ्तार सबसे तेज रहती है। इस बार मानसून की अच्छी बारिश का सहारा तो किसानों को मिल रहा है मगर कई क्षेत्रों को विषम परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ रहा है। मानसून के अनियमित चाल एवं वर्षा के असमान वितरण का खरीफ फसलों पर कितना और कैसा प्रभाव पड़ता है यह देखना आवश्यक होगा।