मार्च तिमाही के दौरान एफएमसीजी उद्योग की आमदनी में 11 प्रतिशत का इजाफा
08-May-2025 06:03 PM
मुम्बई। तेजी से उभरते उपभोक्ता उत्पाद (एफएमसीजी) उद्योग की आमदनी में जनवरी-मार्च 2025 की तिमाही के दौरान करीब 11 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। इसके तहत उत्पादों की बिक्री में हुई वृद्धि से आमदनी 5.1 प्रतिशत बढ़ी जबकि कीमतों में हुई वृद्धि से आमदनी 5.6 प्रतिशत बढ़ गई।
एक अग्रणी विश्लेषक के अनुसार यद्यपि कुल मिलाकर महंगाई में कमी आई लेकिन खाद्य तेलों का भाव ऊंचा रहने से विभिन्न उत्पादों की कीमतें महंगी बनी रहीं।
इससे आमदनी में इजाफा हो गया। उत्पादों की बिक्री की तुलना ऊंची कीमतों ने कुल आय संवर्धन में ज्यादा योगदान दिया जिससे संकेत मिलता है कि उपभोक्ताओं ने छोटे पैक साइज की खरीद में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई।
हालांकि समीक्षाधीन अवधि के दौरान सभी संवर्ग में बिक्री अधिक हुई मगर खाद्य उत्पादों की तुलना में गैर खाद्य सामानों की बिक्री ज्यादा देखी गई। कुल महंगाई में कमी आई मगर खाद्य तेलों के ऊंचे भाव के कारण इससे निर्मित उत्पाद महंगे बने रहे।
ग्रामीण इलाकों में एफएमसीजी उत्पादों की बिक्री में वृद्धि का सिलसिला जारी रहा लेकिन महानगरों एवं बड़े-बड़े शहरों में बिक्री की वृद्धि दर कुछ घट गई।
चूंकि इस वर्ष भी मानसून की अच्छी वर्षा होने का अनुमान लगाया गया है और टैक्स स्लैब को संशोधित किया गया है इसलिए अप्रैल-जून की मौजूदा तिमाही के साथ-साथ आगामी समय के दौरान एफएमसीजी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
गेहूं का दाम घट रहा है और दालों की कीमतों में भी ज्यादा तेजी नहीं है। पाम तेल का आयात मूल्य आगामी महीनों में घटने की संभावना है क्योंकि मलेशिया-इंडोनेशिया में इसका भाव नरम पड़ने लगा है।
चीनी की कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव के साथ लगभग स्थिरता बनी हुई। इसके फलस्वरूप खाद्य उत्पादों का निर्माण करने वाली एफएमसीजी कंपनियों के उत्पादों का लागत खर्च कुछ नीचे गिर सकता है।
जो कंपनियां इसके अनुरूप दाम घटाकर उपभोक्ताओं को आकर्षित करने में सफल होंगी उसका कारोबार बढ़ जाएगा जबकि अन्य फर्मों के व्यापार में ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं हो पाएगी। नवम्बर 2024 से अप्रैल 2025 तक पाम तेल का आयात भारत में कम हुआ क्योंकि इसका दाम सोयाबीन तेल से ऊंचा चल रहा है।
