मोटे अनाजों की बिजाई में धीरे-धीरे बढ़ रही है किसानों की दिलचस्पी

11-Nov-2025 11:42 AM

नई दिल्ली। रबी सीजन के दौरान मोटे अनाजों के संवर्ग में मुख्यतः ज्वार, मक्का एवं जौ की खेती अधिक क्षेत्रफल में होती है जबकि रागी एवं स्मॉल मिलेट्स का रकबा छोटा रहता है। बाजरा की बिजाई भी सीमित क्षेत्रफल में होती है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चालू रबी सीजन में 7 नवम्बर तक मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र सुधरकर 10.13 लाख हेक्टेयर पर पंहुचा जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 9.02 लाख हेक्टेयर से 1.11 लाख हेक्टेयर या 10 प्रतिशत अधिक है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान ज्वार का उत्पादन क्षेत्र 5.26 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 5.28 लाख हेक्टेयर,

मक्का का क्षेत्रफल 2.83 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.21 लाख हेक्टेयर, जौ का बिजाई क्षेत्र 51 हजार हेक्टेयर से उछलकर 1.12 लाख हेक्टेयर तथा रागी का रकबा 38 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 47 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया। बाजरा एवं स्मॉल मिलेट्स का रकबा क्रमश: 2 हजार हेक्टेयर एवं 3 हजार हेक्टेयर पर स्थिर रहा।  

मक्का के घरेलू बाजार भाव में जोरदार गिरावट आने से इसका बिजाई क्षेत्र पहले घटने के संकेत मिल रहे थे लेकिन अब इसमें कुछ इजाफा हो गया है।

रबी सीजन के एक खास मोटे अनाज- जौ की खेती में एक बार फिर किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि पिछली फसल से उसे बेहतर आमदनी प्राप्त हुई। रबी फसलों की खेती के लिए मौसमी परिस्थितियां अनुकूल है इसलिए फसलों का चयन करने में किसानों को सुविधा हो रही है।