नई फसल की आवक एवं विदेशों से आयात के कारण तुवर-उड़द का भाव नरम

31-Dec-2024 05:24 PM

नई दिल्ली । प्रमुख उत्पादक राज्यों में अरहर (तुवर) की नई फसल की कटाई-तैयारी जोर पकड़ने से विभिन्न मंडियों में इसकी आपूर्ति बढ़ने लगी है जबकि उड़द के नए माल की आवक पहले से ही हो रही है।

म्यांमार, अफ्रीकी देशों तथा ब्राजील से तुवर एवं उड़द का नियमित रूप से आयात हो रहा है जिससे घरेलू प्रभाग में इसकी उपलब्धता बढ़ गई है।

इस बार तुवर के शानदार उत्पादन के संकेत मिल रहे हैं। पीली मटर, देसी चना तथा मसूर का भी भारी आयात हो रहा है। इससे थोक मंडियों में दलहनों का भाव घटने लगा है जबकि खुदरा बाजार में भी दाम नीचे आने की संभावना है। 

व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक एक साल पूर्व पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गई थी और तब से अब तक  25 लाख टन से अधिक पीली मटर का आयात हो चुका है। इसके अलावा देसी चना का आयात भी बढ़ा है। ऑस्ट्रेलिया से नया माल भारत में पहुंचने लगा है। 

2022-23 के मुकाबले 2023-24 सीजन के दौरान चना की पैदावार 10 प्रतिशत घटकर 110.30 लाख टन पर सिमटने के कारण दलहनों का कुल उत्पादन भी 7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 242.40 लाख टन पर अटक गया।

चना की फसल को प्रतिकूल मौसम का सामना करना पड़ा था। इसे देखते हुए उद्योग-व्यापार समीक्षकों ने इसके उत्पादन में सरकारी अनुमान  से काफी अधिक गिरावट आने की आशंका व्यक्त की थी।

यह काफी हद तक सही भी थी क्योंकि घरेलू प्रभाग में चना की आपूर्ति एवं उपलब्धता घटने तथा कीमत उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से चिंतित सरकार को अंततः लम्बे अंतराल के बाद इस महत्वपूर्ण दलहन के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने के लिए विवश होना पड़ा।

ध्यान देने वाली बात है कि पहले सरकार ने चना के विकल्प के रूप में पीली मटर के आयात को शुल्क मुक्त किया था लेकिन जब उससे बात नहीं बनी तब चना के आयात को भी पूरी तरह खोल दिया। पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को 31 जनवरी 2025 तक बढ़ा दिया गया है। 

देश में दलहनों के कुल उत्पादन में चना का योगदान 50 प्रतिशत के करीब रहता है और पिछले साल के मुकाबले चालू रबी सीजन में इसका क्षेत्रफल करीब 80 हजार हेक्टेयर आगे है। इसका उत्पादन आगामी महीनों के मौसम पर निर्भर करेगा। तुवर की फसल काफी अच्छी हालत में है।