नर्मदा पुरम में हीट वेव से मूंग की फसल प्रभावित
12-Apr-2025 01:27 PM
इंदौर। भयंकर गर्मी, बारिश की कमी एवं ऊंचे तापमान के कारण मध्य प्रदेश के नर्मदा पुरम जिले में इस वर्ष न केवल मूंग की ग्रीष्मकालीन फसल की बिजाई पिछड़ रही है बल्कि इसके विकास पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। गत 7 अप्रैल को इस जिले में उच्चतम तापमान बढ़कर 44.3 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया और इस तरह वह भारत के पांच सबसे गर्म स्थान की सूची में शामिल हो गया।
उल्लेखनीय है कि ग्रीष्मकाल या जायद सीजन के दौरान मध्य प्रदेश में मूंग की सर्वाधिक खेती नर्मदा पुरम जिले में ही होती है। वहां इसका उत्पादन क्षेत्र 3.50 लाख हेक्टेयर से भी ज्यादा रहता है।
मांग मजबूत रहने तथा कीमत तुरंत मिलने से किसान मूंग की खेती के प्रति काफी उत्साहित रहते हैं और किसी भी कीमत पर इसकी बिजाई करना चाहते हैं। लेकिन इस वर्ष मौसम किसानों का साथ नहीं दे रहा है।
इस जिले के किसानों में मूंग की खेती के प्रति इतना जूनून होता है कि वे गेहूं फसल की कटाई-तैयारी के बाद तुरंत खेतों में आग लगाकर अवशेषों को जला देते हैं। इसे हवा की तीव्रता और निकटवर्ती खेतों की भी चिंता नहीं रहती है।
कुछ दिन पूर्व इसी तरह की आग से करीब 100 एकड़ में लगे गेहूं की फसल जल कर राख हो गई जबकि पर्यावरण को भी काफी नुकसान हुआ।
ऊंचे तापमान के कारण इस बार गेहूं की फसल जल्दी पक गई और उसकी कटाई-तैयारी भी होने लगी। इसके फलस्वरूप किसानों को मूंग की बिजाई के लिए ज्यादा समय मिल गया लेकिन भयंकर गर्मी से खेतों की मिटटी सूख गई और इसमें मूंग की बिजाई करने में किसानों को भारी कठिनाई हो रही है।
वहां किसान मूंग की फसल को जल्दी से जल्दी पकाने के लिए हर्बीसाइड एवं पाराकार जैसे रसायनों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं ताकि बाद में खरीफ फसलों की खेती के लिए भी समय मिल सके।
वहां ग्रीष्मकालीन मूंग की औसत उपज दर करीब 14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहती हैं मगर किसान इसे बढ़ाने के लिए अनुचित तरीका भी अपनाते हैं।
