निर्यात मांग के सहारे जीरा में कुछ तेजी आने के आसार

07-Apr-2025 06:07 PM

राजकोट। दोनों प्रमुख उत्पादक प्रांतों- गुजरात एवं राजस्थान में मौसम साफ होने से जीरा फसल की कटाई-तैयारी की गति तेज हो गई है लेकिन मार्च क्लोजिंग के बाद भी मंडियों में इसकी आपूर्ति सीमित ही देखी जा रही है।

पहले गुजरात के उत्पादकों ने कमजोर भाव को देखते हुए जीरा का स्टॉक रोकना शुरू किया और अब राजस्थान के उत्पादक एवं स्टॉकिस्ट भी मंडियों में सीमित मात्रा में माल उतार रहे हैं दूसरी ओर जीरा की खरीद में दिसावरी व्यापारियों के साथ-साथ निर्यातकों की मांग भी मजबूत देखी जा रही है। 

दरअसल भारत अभी जीरा के अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में एकमात्र प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। तुर्की, सीरिया, ईरान एवं अफगानिस्तान में जीरा की नई फसल आने में अभी देर है और पुराना स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है।

जो थोड़ा-बहुत स्टॉक बचा हुआ है उसका निर्यात ऑफर मूल्य काफी ऊंचा चल रहा है। चीन में जीरा का भाव लगातार बढ़ता जा रहा है जिससे भारतीय जीरे के प्रति उसके आयातकों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है।

भारतीय जीरे की क्वालिटी इस बार काफी अच्छी देखी जा रही है क्योंकि फसल को प्रतिकूल मौसम या प्राकृतिक आपदाओं का सामना नहीं करना पड़ा। 

हालांकि पिछले साल की तुलना में 2024-25 सीजन के दौरान गुजरात एवं राजस्थान में जीरा के बिजाई क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई मगर अनुकूल मौसम के कारण उपज दर ऊंची होने के कारण इसका कुल उत्पादन गत वर्ष के आसपास पहुंच जाने की संभावना है।

गुजरात में नए जीरे की आवक पहले ही आरंभ हो चुकी थी जबकि राजस्थान में आपूर्ति कुछ देर से शुरू हुई। दोनों राज्यों में फसल की हालत अच्छी बताई जा रही है। अच्छी क्वालिटी के सूखे माल की ज्यादा आपूर्ति होने से जीरा का भाव मजबूत होता जा रहा है। वायदा में भी स्थिति अच्छी बनी हुई है। 

मार्च क्लोजिंग से पूर्व गुजरात की ऊंझा मंडी में जीरा की औसत दैनिक आवक बढ़ते हुए 70-72 हजार बोरी के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी जो अब घटकर 35-37 हजार बोरी रह गई है।

आगे भी दैनिक आवक ज्यादा बढ़ने की उम्मीद नहीं है क्योंकि राजस्थान के उत्पादक वहां सीमित मात्रा में अपना स्टॉक उतार रहे हैं। अपेक्षाकृत कम आवक एवं मजबूत मांग के कारण ऊंझा में पिछले दिनों जीरा के दाम में क्वालिटी के आधार पर 400 रुपए प्रति 20 किलो तक की भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।

गुजरात में पिछले साल के मुकाबले इस बार जीरा का क्षेत्रफल करीब 15 प्रतिशत घटकर 4.77 लाख हेक्टेयर के करीब रह गया और राजस्थान में भी रकबा 10-15 प्रतिशत पीछे रहा निर्यातकों की मजबूत मांग से जीरा का दाम कुछ और सुधरने की उम्मीद है। खाड़ी क्षेत्र के देशों में भी इसकी अच्छी मांग बनी हुई है।