नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स कौंसिल द्वारा अखरोट एवं काजू के सैपलिंग का आयात शुरू
08-May-2025 08:15 PM
मंगलोर। नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स कौंसिल ऑफ इंडिया (एनडीएफसी) द्वारा विदेशों से अखरोट एवं काजू की उच्च उत्पादकता वाले सैपलिंग का आयात आरंभ कर दिया है ताकि देश में इसका उत्पादन बढ़ाने में सहायता सफलता मिल सके।
कौंसिल के अध्यक्ष का कहना है कि देश को इन उत्पादों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने तथा उत्पादकों को बेहतर आमदनी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह आयात किया जा रहा है।
हालांकि भारत में काजू और अखरोट का अच्छा उत्पादन पहले से ही हो रहा है मगर घरेलू मांग उससे ज्यादा होने के कारण विदेशों से इसके आयात की आवश्यकता बनी रहती है।
कौंसिल के अध्यक्ष के मुताबिक पिछले साल भारत में काजू एवं अखरोट के नए-नए बागान लगाने का छोटा प्रोजेक्ट आरंभ किया गया था और सरकार को उच्च उपज दर तथा बेहतर क्वालिटी वाले प्लांटिंग मैटीरियल का आयात करने की अनुमति देने के लिए राजी भी कर लिया गया।
सरकार ने क्वारंटाइन शर्तों के साथ इसे मंगाने की स्वीकृति प्रदान की थी। भारत में उच्च क्वालिटी के प्लांटिंग मैटीरियल का अभाव रहता है इसलिए कौंसिल को भारत में अखरोट के साथ-साथ काजू के बागानों का भी विकास-विस्तार करने के लिए सैपलिंग का आयात बढ़ाना पड़ रहा है।
अध्यक्ष महोदय के अनुसार वर्ष 2010 से अब तक अखरोट के वैश्विक उत्पादन में करीब तीन गुणा का इजाफा हो चुका है जबकि अन्य सूखे मेवों के उत्पादन में भी दोगुनी-तिगुनी वृद्धि हो गई है
लेकिन भारत में उत्पादन बढ़ाने के मोर्चे पर कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। देश में सिर्फ मुनक्का (अंगूर) के उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है जबकि अन्य सूखे मेवों का उत्पादन स्थिर बना हुआ है।
वर्ष 1980 के दशक में चीन और भारत में अखरोट का उत्पादन लगभग बराबर या समान हो रहा था और वहां भी भारत की तरह हिमालय क्षेत्र में इसके बागान लगाए गए थे लेकिन अब वहां इसका उत्पादन उछलकर 12 लाख टन पर पहुंच गया है जबकि भारत में उत्पादन महज 25 हजार टन पर ही अटका हुआ है और यह सारा उत्पादन जम्मू कश्मीर से प्राप्त हो रहा है।
हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड में मिट्टी और जलवायु जम्मू कश्मीर के समान है और वहां इसकी खेती बड़े पैमाने पर हो सकती है मगर इसके लिए किसानों को प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है।
