News Capsule/न्यूज कैप्सूल: कमजोर मानसून का असर: सोयाबीन और तिलहन फसलों के दामों में तेजी के संकेत
14-Apr-2026 11:43 AM
News Capsule/न्यूज कैप्सूल: कमजोर मानसून का असर: सोयाबीन और तिलहन फसलों के दामों में तेजी के संकेत
★ IMD ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान जताया है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह 2015 के बाद सबसे कमजोर मानसून होगा।
★ कमजोर मानसून का असर तिलहन फसलों, विशेषकर सोयाबीन और मूंगफली, पर पड़ सकता है। कभी विदेशी फसल मानी जाने वाली सोयाबीन अब भारत की प्रमुख घरेलू तिलहन फसल बन चुकी है। पिछले वर्ष बंपर उत्पादन के कारण सोयाबीन के बाजार भाव और MSP के बीच अंतर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, जिससे किसानों को काफी कम कीमत मिली। मध्य प्रदेश में भावांतर योजना के तहत किसानों को कुछ राहत मिली, लेकिन महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात के किसानों को कम दाम मिलने से इस बार बोआई रुचि प्रभावित हो सकती है।
★ सोयाबीन फसल अपेक्षाकृत मजबूत मानी जाती है और इसमें मौसम, कीट तथा वर्षा के प्रति अच्छी सहनशीलता होती है। हालांकि बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी न होने पर अंकुरण प्रभावित हो सकता है, जिससे उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है। यदि कमजोर मानसून के कारण उत्पादन कम हुआ, तो भारत की सोया तेल आयात निर्भरता और बढ़ सकती है।
★ इसी तरह मूंगफली फसल पर भी असर पड़ सकता है। भारत मूंगफली तेल का आयात नहीं करता, लेकिन घरेलू मांग पूरी तरह स्थानीय उत्पादन पर निर्भर है। यदि उत्पादन घटता है, तो घरेलू बाजार में आपूर्ति दबाव बढ़ सकता है।
★ यदि विभिन्न मौसम एजेंसियों के कमजोर मानसून के अनुमान सही साबित होते हैं, तो आने वाले समय में सभी तिलहन फसलों के दाम मजबूत रह सकते हैं।
★ इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है, जबकि खाद्य तेल बाजार में महंगाई दबाव बढ़ सकता है।
