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रूई का उत्पादन घटने एवं भाव ऊंचा होने से वस्त्र उद्योग चिंतित

30-Oct-2026 01:07 PM

रूई का उत्पादन घटने एवं भाव ऊंचा होने से वस्त्र उद्योग चिंतित

मम्बई। भारतीय वस्त्र उद्योग को कच्चे माल की आपूर्ति की चिंता सता रही है। रूई के घरेलू उत्पादन में गिरावट आने तथा भाव ऊंचा रहने से उद्योग की चुनौती बढ़ रही है रूई की मांग एवं खपत तेजी से बढ़ रही है मगर इसके अनुरूप आपूर्ति एवं उपलब्धता में इजाफा नहीं हो रहा है। विदेशों से विशाल मात्रा में रूई के आयात की आवश्यकता पड़ती है।  

समीक्षकों के मुताबिक 2026-27 सीजन के दौरान देश में रूई का उत्पादन घटकर 290 लाख गांठ से नीचे आने की संभावना है जबकि इसकी मांग 340 लाख गांठ से ज्यादा रहने की उम्मीद है। इस तरह मांग एवं आपूर्ति के बीच कम से कम 50 लाख गांठ का भारी अंतर रह सकता है। 

इस विशाल अंतर को पाटने के लिए विदेशों से भारी मात्रा में रूई के आयात की आवश्यकता पड़ेगी। 31 अक्टूबर तक रूई का आयात शुल्क मुक्त रहेगा और ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार इसकी अवधि दो माह बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2026 तक नियत कर सकती है।

रूई पर पहले 11 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू था। शुल्क मुक्त आयात की अवधि बढ़ाने के सम्बन्ध में अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय की घोषणा नहीं की गई है।