रूस-यूक्रेन से आपूर्ति घटने का गेहूं के वैश्विक बाजार पर असर
10-Sep-2026 07:46 PM
पेरिस। हालांकि रूस तथा यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से ही युद्ध जारी है लेकिन अब इसकी भयंकरता काफी बढ़ गई है। दोनों देश एक-दूसरे के बंदरगाहों एवं व्यापारिक जहाजों पर भीषण हमले कर रहे हैं जिससे काला सागर के जलमार्ग से गेहूं सहित अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात शिपमेंट ठप्प पड़ने लगा है। मालूम हो कि रूस दुनिया में गेहूं का सबसे प्रमुख निर्यातक और तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। यूक्रेन से भी विशाल मात्रा में गेहूं का निर्यात किया जाता है।
रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध आरंभ होने के बाद वसंतकालीन गेहूं का वायदा भाव उछलकर 14 डॉलर प्रति बुशेल के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था लेकिन बाद में उतनी ही तेजी से तीन वर्षों तक घटता भी रहा। अक्टूबर 2025 में यह घटकर 5.45 डॉलर प्रति बुशेल पर आ गया था।
वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान गेहूं के वायदा मूल्य में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया जबकि जुलाई से इसमें तेजी मजबूती का एक नया दौर आरंभ हो गया। बाजार को अंततः काला सागर से शिपमेंट बाधित होने की गंभीरता का एहसास हुआ और वहां हलचल तेजी से बढ़ने लगी। एक सप्ताह के अंदर ही गेहूं के वायदा मूल्य में 60 सेंट प्रति बुशेल का उछाल आ गया। वर्तमान समय में भाव 7.65 से 7.75 डॉलर प्रति बुशेल के बीच चल रहा है।
समीक्षकों के अनुसार गेहूं के दाम में आई तेजी का कारण सिर्फ रूस-यूक्रेन से शिपमेंट में कमी आना नहीं है बल्कि कुछ अन्य कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। प्रतिकूल मौसम के कारण इस वर्ष अमरीका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी एवं अर्जेन्टीना जैसे देशों से गेहूं का उत्पादन घटने की संभावना है। गेहूं के वैश्विक उत्पादन अनुमान में भी भारी कटौती की जा रही है। गेहूं के वैश्विक उत्पादन अनुमान में भी भारी कटौती की जा रही है। इससे आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है। रूस-यूक्रेन के पास गेहूं का विशाल निर्यात योग्य स्टॉक तो मौजूद है मगर जब तक काला सागर क्षेत्र में हालात सामान्य नहीं हो जाते है तब तक वैश्विक बाजार में गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता का संकट बना रह सकता है।
