ऑर्गेनिक रूई को प्रमाण पत्र देने में अनियमितता के आरोप का खंडन

28-Jul-2025 04:23 PM

नई दिल्ली। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने इस आरोप का जोरदार खंडन किया है कि नेशनल-प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन (एनपोप) के अंतर्गत ऑर्गेनिक  रूई को प्रमाण पत्र देने के मामले में कोई अनियमितता बरती गई है।

केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में एपीडा ने स्पष्ट किया है कि हाल ही में इस आशय का जो आरोप लगाया गया था वह पूरी तरह असत्य, निराधार एवं भ्रामक है और केवल भारत की विश्वसनीय नियामक प्रणाली को कमजोर करने का एक माध्यम है। 

उल्लेखनीय है कि वाणिज्य विभाग द्वारा वर्ष 2001 में प्रोग्राम (एनपोप) का शुभारम्भ किया गया था जो कॉटन निर्यात के लिए एक आधिकारिक ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन प्रोग्राम है।

इसका क्रियान्वयन एवं संचालन एपीडा द्वारा किया जाता है और इसमें थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया जाता है।

इस प्रणाली को यूरोपीय संघ के मानक के समतुल्य की मान्यता प्राप्त है और स्विट्जरलैंड तथा ब्रिटेन द्वारा भी इसे स्वीकार किया गया है। इधर एशिया में ताइवान इस प्रणाली को मान्यता प्रदान का चुका है।   

यह आरोप लगाया गया था कि ऑर्गेनिक कपास का उत्पादन केवल मध्य प्रदेश में होता है और इसकी खेती कुछ कृषक समूहों तक सीमित है जबकि सर्टिफिकेट अन्य क्षेत्रों में उत्पादित रूई के लिए भी प्रदान किया जा रहा है।

लेकिन एपीडा ने इसे असत्य कहा है। उसका कहना है कि 19 जुलाई 2025 तक की स्थिति के अनुसार देश के 31 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के कुल 4712 सक्रिय ऑर्गेनिक  उत्पादक समूह को चिन्हांकित किया जा चुका है।

इसमें 19.30 लाख सर्टिफाइड किसान शामिल है जो ऑर्गैनिक पद्धति से अनाज, दलहन, तिलहन, चाय, कॉफी, मसाले एवं कपास का उत्पादन करते हैं।