ऑस्ट्रेलिया में चना की अच्छी बिजाई होने की उम्मीद
28-Mar-2025 07:50 PM
मेलबोर्न। दुनिया में चना के सबसे प्रमुख निर्यातक देश- ऑस्ट्रेलिया में एक बार फिर इस महत्वपूर्ण दलहन के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद की जा रही है क्योंकि एक तो प्रमुख उत्पादक राज्यों में मौसम एवं वर्षा की हालत अनुकूल बनी हुई है और दूसरे, गेहूं का भाव घटकर नीचे आने से चना की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बढ़ सकता है।
सरकारी एजेंसी- अबारेस के मुताबिक 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में चना का घरेलू उत्पादन उछलकर 22.70 लाख टन के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
एक अन्य एजेंसी- ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती चार महीनों में यानी अक्टूबर 2024 से जनवरी 2025 के दौरान देश से रिकॉर्ड 16 लाख टन चना का निर्यात हो गया जिसका अधिकांश भाग भारत को भेजा गया।
भारत में अब चना पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया गया है जो 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा। फरवरी 2025 में ऑस्ट्रेलिया के लगभग एक लाख टन चना का निर्यात होने का अनुमान है जबकि मार्च का शिपमेंट और भी कमजोर रहेगा।
दरअसल नई घरेलू फसल की आपूर्ति बढ़ने एवं कीमत घटने से भारतीय आयातकों ने ऑस्ट्रेलियाई चना की खरीद लगभग बंद कर दी है।
यदि फरवरी 2025 तक ऑस्ट्रेलिया से 17 लाख टन चना का निर्यात मान लिया जाए तो 1 मार्च को वहां मौजूदा फसल के स्टॉक से 5.70 लाख टन चना बचा हुआ था।
इसमें से 50 हजार टन का स्टॉक ऑस्ट्रेलियाई किसान अगली बिजाई के लिए सुरक्षित रखेंगे और इसके बाद बचने वाले 5.20 लाख टन के स्टॉक का निर्यात पाकिस्तान एवं बांग्ला देश सहित कुछ अन्य देशों को करना पड़ेगा।
संयोग से भारत में चना का रिकॉर्ड आयात हो गया अन्यथा ऑस्ट्रेलिया के उत्पादकों एवं निर्यातकों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता था।
ऑस्ट्रेलियाई बाजार से भारत के प्रस्थान करने तथा बल्क रूप में निर्यात लगभग ठप्प पड़ने से चना के दाम में नरमी आ गई और अब अगली नई फसल के कारोबार पर सबका ध्यान केन्द्रित हो गया है।
वहां चना की बिजाई मई-जून में होगी। कुछ माह पूर्व की तुलना में वहां चना का भाव करीब 100 डॉलर प्रति टन घट गया है लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान मूल्य स्तर भी किसानों के लिए काफी आकर्षक है और इसलिए वे चना की खेती में अच्छी दिलचस्पी दिखा सकते हैं।
