ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के मसूर निर्यात में गिरावट, भारत के लिए संतुलित अवसर वैश्विक निर्यात स्थिति
10-Jun-2025 06:04 PM
ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के मसूर निर्यात में गिरावट, भारत के लिए संतुलित अवसर
वैश्विक निर्यात स्थिति
★ ऑस्ट्रेलिया से कुल मसूर निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है।
★ अप्रैल 2025 में केवल 53,525 टन निर्यात हुआ, जो मार्च 2025 के 1,05,101 टन के मुकाबले 49 प्रतिशत कम है।
★ पिछले वर्ष अप्रैल 2024 में यह आंकड़ा 1,22,620 टन था।
★ नवंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच कुल निर्यात 7,72,447 टन रहा,
★ जबकि नवंबर 2023 से अप्रैल 2024 के बीच यह 8,42,655 टन था।
★ इस तरह सालाना स्तर पर लगभग 70,000 टन की गिरावट आई है।
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भारत को ऑस्ट्रेलिया से मसूर निर्यात (फरवरी से अप्रैल 2025)
फरवरी: 58,077 टन
मार्च: 26,614 टन
अप्रैल: 13,452 टन
कुल: 98,142 टन
वहीं, सभी देशों से भारत को इसी अवधि (फरवरी–अप्रैल) में कुल 3,06,550 टन मसूर का आयात हुआ।
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कनाडा से भारत को निर्यात में गिरावट
★ कनाडा से फरवरी 2025 में भारत को 1,10,801 टन मसूर का निर्यात हुआ।
★ मार्च और अप्रैल में कनाडा भारत के शीर्ष 3 निर्यातक देशों में शामिल नहीं रहा,
★ जिससे वहां स्टॉक की कमी या आपूर्ति में गिरावट का संकेत मिलता है।
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वर्तमान वैश्विक स्थिति और आने वाले संकेत
★ ऑस्ट्रेलिया और कनाडा – दोनों ही प्रमुख निर्यातकों में स्टॉक की उपलब्धता कम है।
★ नई बुवाई की प्रक्रिया इन देशों में जारी है।
★ ऑस्ट्रेलिया की कृषि एजेंसी ABARES ने इस वर्ष 17 प्रतिशत अधिक उत्पादन का अनुमान जताया है।
★ वहीं कनाडा में बारिश की कमी के कारण मसूर की फसल पर दबाव बना हुआ है।
★ नई फसलें सितंबर 2025 से बाजार में आने की उम्मीद है।
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भारत के लिए संभावनाएं
★ इस वर्ष भारत में मसूर का उत्पादन बेहतर रहा है, साथ ही आयात भी समय रहते किया गया है।
★ ऐसे में आगामी महीनों में भारत में आयात की आवश्यकता सीमित रह सकती है।
★ सरकारी एजेंसियों द्वारा लगातार की जा रही बिक्री से स्टॉक में कमी आ रही है,
★ लेकिन घरेलू बाजार में आपूर्ति अब भी संतुलित बनी हुई है।
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कुल मिलाकर
★ भारत में मसूर की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।
★ वैश्विक आपूर्ति में गिरावट और घरेलू उपलब्धता के बीच संतुलन बना हुआ है।
★ सितंबर से नई फसल की आमद से बाजार को और स्थिरता मिलने की संभावना है।
