ऑस्ट्रेलियाई चना एवं मसूर के निर्यात कारोबार की गति धीमी
28-Mar-2025 01:30 PM
ब्रिसबेन। ऑस्ट्रेलियाई दलहनों के सबसे प्रमुख खरीदार भारत में मसूर तथा देसी चना पर 10-10 प्रतिशत का मूल आयात शुल्क लगाया गया है जो 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हो जाएगा। ऑस्ट्रेलिया में इस बार चना का शानदार उत्पादन हुआ मगर भारत द्वारा रिकॉर्ड मात्रा में इसकी खरीद किए जाने तथा कई अन्य देशों में भी अच्छा आयात होने से वहां अब निर्यात योग्य स्टॉक में भारी कमी आ गई है।
जहां तक मसूर का सवाल है तो ऑस्ट्रेलिया में इसके उत्पादन में काफी गिरावट आ गई और शिपमेंट जारी रहने से इसका भी निर्यात योग्य स्टॉक काफी घट गया है।
भारतीय खरीदार आयात शुल्क में वृद्धि की संभावना को देखते हुए पिछले कुछ समय से दलहनों का नया अनुबंध करने से हिचक रहे थे। भारत में मसूर एवं देसी चना के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 31 मार्च 2025 को समाप्त हो जाएगी।
ऑस्ट्रेलिया में शीत कालीन दलहन फसलों की बिजाई का समय अत्यन्त निकट आ गया है। क्वींसलैंड प्रान्त में हुई अच्छी वर्षा से एक बार फिर चना के शानदार उत्पादन की उम्मीद बढ़ गई है जबकि न्यू साउथ वेल्स प्रान्त में मिश्रित स्थिति देखी जा रही है।
दूसरी ओर विक्टोरिया एवं साउथ ऑस्ट्रेलिया प्रान्त में मौसम शुष्क बना हुआ है और सूखे का गंभीर संकट है। सूखे की वजह से इन दोनों राज्यों में ल्युपिन तथा फाबा बीन्स में पशु पालकों या डेयरी क्षेत्र में भारी मांग देखी जा रही है मगर निर्यात के लिए जो थोड़ा-बहुत स्टॉक बचा हुआ है उसके शिपमेंट में समस्या आ रही है। अन्य दलहनों का निर्यात भी धीमा पड़ गया है।
सरकारी एजेंसी- अबारेस ने 2024-25 के सीजन में ऑस्ट्रेलिया में चना का कुल उत्पादन उछलकर 22.70 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है।
दूसरी ओर ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (एबीएस) के आंकड़ों से पता चलता है कि 1 अक्टूबर 2024 से 31 जनवरी 2025 के दौरान देश से चना का रिकॉर्ड बढ़कर 16 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया।
