पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में गेहूं की बिजाई उत्साहवर्धक नहीं

26-Nov-2024 12:44 PM

नई दिल्ली । केन्द्रीय पूल में गेहूं का महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पश्चिमोत्तर क्षेत्र के तीन राज्य- पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में रबी सीजन के इस सबसे प्रमुख खाद्यान्न की बिजाई उत्साहवर्धक ढंग से नहीं हो रही है और फसल की औसत उपज दर तथा कुल पैदावार में भी गिरावट आने की संभावना है।

कृषि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में गेहूं का कुल घरेलू उत्पादन घटकर 10 करोड़ टन के आसपास सिमट सकता है जिससे बाजार भाव मजबूत रहने की उम्मीद है। 

गेहूं की बिजाई में किसानों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जिससे बोआई में देर हो रही है। पंजाब में गेहूं की बिजाई का आदर्श समय 20 नवम्बर को ही समाप्त हो चुका है और वहां इसका क्षेत्रफल गत वर्ष से 18-20 प्रतिशत तक घटने की आशंका है। इसका प्रमुख कारण धान की कटाई में काफी देर होना है।

खेतों से धान को सही समय पर हटाया नहीं जा सका। इसके साथ-साथ वहां डीएपी खाद का भी अभाव रहा जबकि सही समय पर बिजाई के लिए इसकी पर्याप्त उपलब्धता होना आवश्यक था। पंजाब में गेहूं की बोआई के समय तापमान भी ऊंचा रहा कर खेतों की मिटटी में नमी का अंश घट गया। 

हालांकि राजस्थान में भी गेहूं की बिजाई में देर हुई और तापमान ऊंचा रहा लेकिन वहां कुल मिलाकर गेहूं का रकबा थोड़ा-बहुत बढ़ सकता है।

एक तो वहां मानसून की बारिश देर तक होती रही जिससे खेपों में नमी का अंश मौजूद है और दूसरे, अब तापमान में खासकर रात के समय गिरावट आने लगी है। किसान अपनी ओर से क्षेत्रफल बढ़ाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। 

हालांकि राजस्थान में भी गेहूं की बिजाई में देर हुई और तापमान ऊंचा रहा लेकिन वहां कुल मिलाकर गेहूं का रकबा थोड़ा-बहुत बढ़ सकता है।

एक तो वहां मानसून की बारिश देर तक होती रही जिससे खेतों में नमी का अंश मौजूद है और दूसरे, अब तापमान में खासकर रात के समय गिरावट आने लगी है। किसान अपनी ओर से क्षेत्रफल बढ़ाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।

हरियाणा में भी पंजाब की भांति धान की कटाई में विलम्ब होने से गेहूं की बोआई देर से शुरू हुई। दरअसल पंजाब-हरियाणा में खरीफ फसलों की कटाई एवं रबी फसलों की बिजाई के बीच सीमित समय का अंतर रहता है इसलिए जब खरीफ फसलों की कटाई देर से शुरू होती है या देर तक चलती है तब गेहूं की बिजाई प्रभावित हो जाती है। 

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार इस बार रबी फसलों की कटाई-तैयारी के सीजन में भी गेहूं का भाव सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा रहने की उम्मीद है जिससे किसानों को बेहतर आमदनी प्राप्त हो सकती है। सरकार के साथ-साथ प्राइवेट फर्मों के पास भी गेहूं का सीमित स्टॉक मौजूद रहेगा।