पंजाब के लुधियाना में गेहूं की खरीद में प्राइवेट फर्मों की सक्रियता बढ़ी
08-May-2025 03:57 PM
लुधियाना। पंजाब में गेहूं के एक अग्रणी उत्पादक जिला- लुधियाना की मंडियों में इस बार प्राइवेट फर्में भी गेहूं की खरीद में भारी सक्रियता दिखा रही है जिससे सरकारी खरीद पर असर पड़ रहा है।
प्राप्त सूचना के अनुसार लुधियाना जिले की मंडियों में गेहूं की सरकारी खरीद पिछले साल के मुकाबले इस बार 6 मई तक जहां एक ओर 7.10 लाख टन से घटकर 6.39 लाख टन पर अटक गई वहां प्राइवेट फर्मों की खरीदारी बढ़कर 1.60 लाख टन से ऊपर पहुंच गई जो कुल खरीद का लगभग 20 प्रतिशत है।
उल्लेखनीय है कि पिछले रबी मार्केटिंग सीजन की सम्पूर्ण अवधि के दौरान लुधियाना जिले में प्राइवेट फर्मों द्वारा कुल 1.13 लाख टन गेहूं खरीदा गया था जबकि इस बार 6 मई तक ही खरीद बढ़कर 1.61 लाख टन से ऊपर पहुंच गई।
सरकारी एजेंसियों द्वारा केवल 2425 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूतनम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा जा रहा है। अभी तक वहां किसानों से पनग्रेन द्वारा 1.80 लाख टन, मार्कफेड द्वारा 1.76 लाख टन, पनसप द्वारा 1.20 लाख टन, पंजाब राज्य भंडारण निगम द्वारा 93 हजार टन तथा भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा 59 हजार टन गेहूं खरीदा गया है।
दूसरी ओर प्राइवेट फर्में किसानों को एमएसपी से ऊपर के दाम का ऑफर दे रही हैं जिससे उन्हें गेहूं की खरीद करने में अच्छी सफलता मिल रही है।
हालांकि पनग्रेन पंजाब में गेहूं की खरीद के दृष्टिकोण से सबसे बड़ी एजेंसी बनी हुई है लेकिन लुधियाना जिले में उसकी खरीद की मात्रा गत वर्ष के 2.09 लाख टन से काफी पीछे चल रही है।
इससे साफ संकेत मिलता है कि किसान प्राइवेट खरीदारों को अपना गेहूं बेचने में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। प्राइवेट फर्मों द्वारा गेहूं उत्पादकों को समर्थन मूल्य से 75 से 100 रुपए प्रति क्विंटल तक का ऊंचा दाम दिया जा रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू रबी मार्केटिंग सीजन के दौरान लुधियाना जिले की 147 मंडियों में 6 मई तक कुल मिलाकर करीब 8.07 लाख टन गेहूं की आवक हुई जिसमें से 8.04 लाख टन की खरीद हो गई।
इस बार इन मंडियों में 8.29 लाख टन गेहूं की आवक का लक्ष्य नियत किया गया है जिसके 97 प्रतिशत भाग की आपूर्ति हो चुकी है। खरीद की अवधि 15 मई को समाप्त होगी और तब तक गेहूं की आवक जारी रह सकती है।
लेकिन मंडियों से अभी तक केवल 6.80 लाख टन गेहूं का उठाव हो सका है। प्राइवेट फर्में तो जल्दी-जल्दी उठाव कर रही है मगर सरकारी एजेंसियों की गति धीमी है।
