पंजाब में कपास के बिजाई क्षेत्र में 20 प्रतिशत की वृद्धि
10-Jun-2025 03:08 PM
चंडीगढ़। पंजाब में पिछले तीन वर्षों से कपास के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट का रुख बना हुआ था जिस पर इस वर्ष ब्रेक लग गया। पंजाब के कृषि मंत्री के अनुसार राज्य में कपास का बिजाई क्षेत्र पिछले साल के 2.49 लाख एकड़ से करीब 20 प्रतिशत या 49 हजार एकड़ बढ़कर इस बार 2.98 लाख एकड़ पर पहुंच गया।
कृषि मंत्री के मुताबिक कपास की खेती में इस बार फाजिल्का जिला सबसे आगे रहा जहां इसका क्षेत्रफल बढ़कर 60,121 हेक्टेयर पर पहुंच गया। इसके बाद कपास का रकबा मनसा जिले में 27,621 हेक्टेयर, भटिंडा में 17,080 हेक्टेयर और श्री मुक्तसर साहिब में 13,240 हेक्टेयर दर्ज किया गया।
पंजाब सरकार ने इस वर्ष किसानों को कपास बीज (कॉटन सीड) की खरीद पर 33 प्रतिशत की सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। इसके लिए 49 हजार से अधिक किसान पहले ही अपना रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। कृषि मंत्री ने मुख्य कृषि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि 15 जून 2025 तक सभी कपास उत्पादकों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाए।
पंजाब में कीड़ों रोगों के भयंकर प्रकोप से फसल को होने वाले जबरदस्त नुकसान को देखते हुए कपास की खेती में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण तेजी से घटता जा रहा था और इससे क्षेत्रफल तथा उत्पादन में भारी गिरावट आ रही थी। किसानों को कपास की खेती से अपेक्षित आमदनी भी प्राप्त नहीं हो रही थी जिससे उसकी दिलचस्पी घटने लगी थी। केन्द्र सरकार ने कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2024-25 की तुलना में 2025-26 सीजन के दौरान मध्यम रेशेवाली किस्म के लिए 7121 रुपए प्रति क्विंटल से 589 रुपए बढ़ाकर 7710 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशेवाली श्रेणी के लिए 7521 रुपए प्रति क्विंटल से 589 रुपए बढ़ाकर 8110 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इससे किसानों को कुछ प्रोत्साहन मिला। इसके अलावा राज्य कृषि विभाग ने किसानों को ठोस आश्वासन दिया है कि कपास की फसल को पिंक वॉलवर्म कीट तथा सफेद मक्खी के प्रकोप से बचाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। पंजाब में कपास की अगैती खेती होती है। वहां इसकी बिजाई का आदर्श समय 20 अप्रैल से 20 मई के बीच माना जाता है। पंजाब में कपास की बिजाई पूरी हो चुकी है और फसल अब प्रगति के दौर से गुजर रही है।
