पंजाब में उपयुक्त भूमि से काफी अधिक क्षेत्र में धान की खेती
14-Apr-2025 08:27 PM
चंडीगढ़। केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न का सर्वाधिक योगदान देने वाले प्रान्त- पंजाब में प्रति वर्ष खरीफ सीजन के दौरान औसतन 32 लाख हेक्टेयर भूमि में धान की खेती होती है जो उसके कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 64 प्रतिशत है।
इस बीच लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्व विद्यालय (पीएयू) की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि राज्य में केवल 30 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि ही धान की खेती के लिए उपयुक्त है।
इसके आधार पर वहां धान का कुल रकबा 15.28 लाख हेक्टेयर बैठता है। पीएयू ने पंजाब में धान के उत्पादन क्षेत्र को आधा से अधिक घटाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि धान की फसल को सिंचाई के लिए अन्य फसलों की तुलना में पानी की अधिक जरूरत पड़ती है जबकि पंजाब में पानी का संकट बढ़ता जा रहा है।
पीएयू की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में जरूरत से काफी ज्यादा क्षेत्रफल में चावल (धान) का उत्पादन जल संसाधनों में संकुचन पैदा हो रहा है बल्कि मिटटी की उर्वरा शक्ति में भी कमी आ रही है।
रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशी दवाओं का इस्तेमाल बढ़ने से भविष्य में वहां उत्पादकता दर में भारी गिरावट आने की आशंका बनी हुई है।
अध्ययन रिपोर्ट में आंकड़ों का हवाला देते हुए पंजाब में कृषि क्षेत्र के भविष्य पर चिंता जताई गई है और ऐसी वैकल्पिक फसलों की खेती पर जोर दिया गया है जिसे कम पानी की जरूरत पड़ती है।
इसमें दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाज की फसल शामिल है। इससे पूर्व भी इस सम्बन्ध में कई रिपोर्ट आ चुकी है जिसमें पंजाब में धान के उत्पादन क्षेत्र में कम से कम 10 लाख हेक्टेयर की कटौती करने का सुझाव दिया गया था।
एक अन्य रिपोर्ट में वहां धान का क्षेत्रफल घटाकर 20 लाख हेक्टेयर से नीचे लाने की आवश्यकता बताई गई थी मगर पंजाब के किसान धान का रकबा घटाने के लिए तैयार नहीं हैं।
