पाकिस्तान को सिंधु जल समझौते के तहत पानी नहीं देने का संकल्प

09-May-2025 01:50 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा है कि सिंधु जल समझौते के तहत पहले तो पानी पाकिस्तान को जारी किया जाता था उसे पूरी तरह रोक दिया जाएगा और इस बचे हुए पानी का घरेलू प्रभाग में उपयोग करने के लिए अक्षय कालीन मध्यम कालीन एवं दीर्घ कालीन प्लान तैयार किया जाएगा। सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पानी का उपयोग भारत के सीमावर्ती राज्यों में सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए किया जाएगा।

पिछले दिन वार्षिक खरीफ अभियान के लिए आयोजित मीटिंग में केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच जो सिंधु जल समझौता हुआ था वह एक ऐतिहासिक भूल थी और उसमें देश के हितों का ध्यान नहीं रखा गया था।

भारत को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। सरकार अब उस गलती को सुधारना चाहती है और इसलिए उसने पाकिस्तान को इस संधि के तहत पानी नहीं देने का निर्णय लिया गया है।

यदि उस समय भारत सरकार ने दृढ़ता एवं दूरदर्शिता दिखाई होती तो आज पाकिस्तान की आर्थिक हालत और भी खराब होती। इस समझौते से पाकिस्तान को भरपूर पानी मिलने लगा जिससे वहां खेतों की स्थिति बेहतर हो गई। कृषि मंत्री के मुताबिक इस संधि के कारण ही सिंधु चिनाब एवं झेलम जैसी नदियों का 80 प्रतिशत पानी पाकिस्तान को मिलने लगा। 

भारत सरकार ने सिंधु जल समझौते को अब स्थगित कर दिया है जिससे पाकिस्तान में हाहाकार मचने लगा है। कृषि मंत्री के अनुसार यह स्थगन का निर्णय भारतीय किसानों के हित में है और खासकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए अधिक मात्रा में पानी उपलब्ध हो सकेगा।

कृषि मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में पाकिस्तान जाने वाले पानी को कैसे रोका जाए, उस पर काम चालू है। केवल पाकिस्तान में प्रवाहित पानी को रोकने की बात है। सिंधु जल संधि पर फैसला सरकार द्वारा बाद में लिया जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में तत्कालीन जल शक्ति मंत्री ने कहा था कि पाकिस्तान में जाने वाले अधिशेष पानी के प्रवाह को रोकने के लिए प्रयास आरंभ हो गया है।