राजस्थान में खरीफ फसलों का क्षेत्रफल 131 लाख हेक्टेयर से ऊपर पहुंचा
17-Jul-2025 12:04 PM
जयपुर। देश के पश्चिमी भाग में अवस्थित एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में इस वर्ष मानसून की भारी बारिश होने से खरीफ फसलों की बिजाई की रफ्तार काफी तेज है और सिर्फ सोयाबीन तथा ग्वार को छोड़कर अन्य सभी फसलों का रकबा गत वर्ष से आगे निकल गया है।
राज्य कृषि विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष राजस्थान में 16 जुलाई तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 131.07 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 114.95 लाख हेक्टेयर से 16.12 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
इसके तहत धान सहित अनाजी फसलों का उत्पादन क्षेत्र 46.85 लाख हेक्टेयर से उछलकर 56.44 लाख हेक्टेयर दलहनों का बिजाई क्षेत्र 24.91 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 30.62 लाख हेक्टेयर तथा तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 19.35 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 19.84 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
नकदी या औद्योगिक फसलों में कपास का उत्पादन क्षेत्र 4.95 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.21 लाख हेक्टेयर हो गया मगर ग्वार का रकबा शुरुआती बढ़त के बाद अब 16.20 लाख हेक्टेयर से गिरकर 15.30 लाख हेक्टेयर रह गया है। गन्ना का क्षेत्रफल भी पिछड़ रहा है।
अनाजी फसलों में धान का उत्पादन क्षेत्र 2.03 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 2.33 लाख हेक्टेयर, ज्वार का बिजाई क्षेत्र 5.53 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 5.97 लाख हेक्टेयर, बाजरा का क्षेत्रफल 30.57 लाख हेक्टेयर से उछलकर 38.88 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का रकबा 8.72 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 9.24 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
इसी तरह दलहन फसलों में मूंग का उत्पादन क्षेत्र 16.90 लाख हेक्टेयर से उछलकर 19.64 लाख हेक्टेयर, मोठ का बिजाई क्षेत्र 4.93 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 7.53 लाख हेक्टेयर, उड़द का क्षेत्रफल 2.58 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 2.76 लाख हेक्टेयर, चौला का रकबा 47 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 57 हजार हेक्टेयर तथा तुवर का क्षेत्रफल 3 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 11 हजार हेक्टेयर हो गया।
तिलहनों के संवर्ग में तिल का उत्पादन क्षेत्र 1.41 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 1.47 लाख हेक्टेयर, मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 7.27 लाख हेक्टेयर से उछलकर 8.78 लाख हेक्टेयर तथा अरंडी का रकबा 8 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 13 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा लेकिन सोयाबीन का क्षेत्रफल 10.58 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.46 लाख हेक्टेयर रह गया।
ऐसा प्रतीत होता है कि अगैती खेती होने के कारण राजस्थान में कुछ फसलों की बिजाई अब संतृप्त अवस्था में पहुंच चुकी है।
