समर्थन मूल्य में अच्छी वृद्धि से दलहनों का रकबा बढ़ने की उम्मीद
14-May-2026 08:35 PM
नई दिल्ली। घरेलू मांग एवं मांग की तुलना में उत्पादन कम होने से देश में प्रति वर्ष विदेशों से विशाल मात्रा में दलहनों के आयात की आवश्यकता पड़ती है जिस पर भारी-भरकम बहुमूल्य विदेशी मुद्रा खर्च होती है। इन दलहनों में अरहर (तुवर), उड़द, चना, मसूर एवं पीली मटर मुख्य रूप से शामिल हैं। इसमें से चना, मसूर एवं मटर की खेती रबी सीजन में होती है और तुवर का उत्पादन खरीफ सीजन में होता है।
उड़द की बिजाई मूंग की भांति खरीफ और रबी-तीनों सीजन में होती है लेकिन भारत में मूंग का आयात नहीं होता है क्योंकि फरवरी 2022 से ही इस पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
सरकार दलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने एवं आयात पर निर्भरता घटाने के लिए हर संभव नीतिगत प्रयास कर रही है। इसके तहत किसानों को बीज का मिनी किट वितरित किया जाता है, दलहन फसलों का ऊंचा समर्थन मूल्य निर्धारित होता है और समर्थन मूल्य पर किसानों से दलहनों की भारी खरीद की जाती है।
इसी श्रृंखला की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए केन्द्र सरकार ने एक बार फिर खरीफ कालीन दलहन फसलों और खासकर तुवर तथा उड़द के न्यूतनम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भारी बढ़ोत्तरी कर दी है। 2025-26 सीजन के मुकाबले 2026-27 सीजन के लिए तुवर का एमएसपी 8000 रुपए प्रति क्विंटल से 450 रुपए बढ़ाकर 8450 रुपए प्रति क्विंटल तथा उड़द का एमएसपी 7800 रुपए प्रति क्विंटल से 400 रुपए बढ़ाकर 8200 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है।
जहां तक मूंग की बात है तो इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल से महज 12 रुपए बढ़ाकर 8780 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। देश में मूंग का पर्याप्त उत्पादन हो रहा है जबकि तुवर-उड़द की पैदावार कम होती है। सरकार का इरादा इसका उत्पादन बढ़ाने का है।
