सीपीओ का भाव नीचे होने से भारत में आयात बढ़ने की संभावना

28-Apr-2025 05:24 PM

कुआलालम्पुर। क्रूड पाम तेल (सीपीओ) के दाम में नरमी आने लगी है और इसका भाव घटकर सोयाबीन तेल से नीचे आ गया है। व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही तक पाम तेल का मूल्य सोयाबीन तेल से नीचे रह सकता है

जिससे भारत में इसकी मांग बढ़ने की उम्मीद है। दिसम्बर 2024 से फरवरी 2025 के दौरान भारत में पाम तेल का मासिक आयात काफी कम हुआ।

इसका प्रमुख कारण कीमतों का ऊंचा रहना था। मार्च के आयात में कुछ सुधार आया लेकिन फिर भी पिछले साल की तुलना में कम रहा। अप्रैल में यद्यपि पाम तेल की कीमत नरम पड़ने लगी मगर आयात पर इसका सकारात्मक असर मई-जून में ही दिखाई पड़ सकता है।

आमतौर पर पाम तेल का निर्यात ऑफर मूल्य सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल से नीचे रहता है मगर इस बार नवम्बर से मार्च तक यह ऊपर रहा। 

समीक्षकों के मुताबिक कीमतों में गिरावट आने से पाम तेल की खरीद में भारतीय आयातकों का उत्साह एवं आकर्षण बढ़ सकता है। इसी तरह अमरीकी टैरिफ के कारण चीन में भी पाम तेल की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

अमरीका एवं चीन ने एक-दूसरे के सामानों पर भारी-भरकम आयात शुल्क लगा दिया है जिसमें सोयाबीन तथा इसके मूल्य संवर्धित उत्पाद भी शामिल है। 

एक अग्रणी समीक्षक के अनुसार मलेशिया तथा इंडोनेशिया में कम से कम अक्टूबर 2025 तक पाम तेल के उत्पादन का स्तर ऊंचा रहने की उम्मीद है इसलिए इसका निर्यात बढ़ाने के वास्ते उत्पादक एवं निर्यातक कीमतों को सोया तेल के सापेक्ष आकर्षक स्तर पर रखने का प्रयास कर सकते हैं।

इसके फलस्वरूप चालू वर्ष की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितम्बर) तक पाम तेल का भाव सोया तेल की तुलना में नीचे रह सकता है। जब तक आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम रहेगी तब तक पाम तेल का भाव प्रतिस्पर्धी स्तर पर रह सकता है।

अमरीका में सितम्बर-अक्टूबर से सोयाबीन के नए माल की आवक शुरू होने पर सोया तेल के दाम में नरमी आ सकती है जबकि मलेशिया- इंडोनेशिया में तब तक पाम तेल के उत्पादन का पीक सीजन समाप्त होने के कगार पर पहुंच जाएगा।