सुपर अल नीनो के खतरे को देखते हुए फसल बीमा योजना पर जोर देना जरुरी

01-Jun-2026 07:58 PM

नई दिल्ली। इस वर्ष देश के मानसून पर सुपर अल नीनो का गंभीर खतरा मंडरा रहा है जिससे विभिन्न खरीफ फसलों को नुकसान तथा कृषक समुदाय को आर्थिक घाटा होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है।

अल नीनो के अभाव एवं कमजोर मानसून के कारण वैसे तो सभी खरीफ फसलें प्रभावित हो सकती हैं लेकिन कुछ ऐसी फसलें हैं जिसके लिए बीमा के सहारे किसान काफी हद तक अपने घाटे की भरपाई करने में सक्षम हो सकते हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि चाहे जैसी भी परिस्थिति हो, किसानों को कोई आर्थिक नुकसान नहीं होना चाहिए। 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत यदि बीमा दावे की कुल राशि उस पर वसूले गए प्रीमियम की कुल रकम के 80 प्रतिशत से कम है तो बीमा कंपनियां सकल प्रीमियम का 20 प्रतिशत भाग अपने पास रखकर शेष राशि सरकार को वापस कर देंगी।

इस बार स्वयं भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने स्वीकार किया है कि दीर्घकालीन औसत के सापेक्ष देश में मानसून की 90 प्रतिशत बारिश ही संभव हो पाएगी।

आमतौर पर 96 से 104 प्रतिशत के बीच होने वाली वर्षा को सामान्य माना जाता है जबकि इस बार नीचे में उससे कम से कम 4 प्रतिशत बिंदु कम बारिश हो सकती है।  

कर्नाटक देश का एकलौता ऐसा राज्य है कि जो पीएम फसल बीमा योजना के अंतर्गत सामान्य स्कीम की तरफ लौटा है जबकि महाराष्ट्र, झारखंड, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान जैसे अनेक राज्य अभी तक यह निर्णय नहीं ले पाए हैं कि फसल बीमा योजना के तहत "कप एंड कैप" मॉडल को समाप्त किया जाए अथवा बरकरार रखा जाए।

धान, दलहन, तिलहन एवं कपास जैसी फसलों के लिए इस बार किसानों को बीमा की ज्यादा आवश्यकता पड़ेगी क्योंकि वर्षा की कमी का सर्वाधिक असर इन्हीं फसलों पर पड़ने की आशंका है।