साप्ताहिक समीक्षा- गेहूं

05-Jul-2025 06:27 PM

राजकोट को छोड़ अन्य मंडियों में गेहूं के दाम में सीमित उतार-चढ़ाव   

नई दिल्ली। गेहूं की कीमतों में अब काफी हद तक स्थिरता आने लगी है क्योंकि एक तो फ्लोर मिलर्स / प्रोसेसर्स के पास इसका अच्छा स्टॉक मौजूद है और व्यापारियों / स्टॉकिस्टों को भी इस बार किसानों से अच्छी मात्रा में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की खरीद करने में सफलता मिली जबकि सरकार ने गेहूं पर स्टॉक लिमिट (भंडारण सीमा) लगा रखी है। अनेक मंडियों में गेहूं की अच्छी आवक हो रही है और बाजार में ऐसी चर्चा है कि सरकार अगले महीने से ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री शुरूकर सकती है। 
दिल्ली 
28 जून से 4 जुलाई वाले सप्ताह के दौरान दिल्ली में गेहूं का भाव 5 रुपए सुधरकर 2735-2740 रुपए प्रति क्विंटल तथा राजकोट में 300 रुपए उछलकर 2500/300 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया दिल्ली में रोजाना औसतन 5-10 हजार बोरी तथा राजकोट में 1500/3000 बोरी गेहूं की आवक हुई। 
मध्य प्रदेश 
मध्य प्रदेश की मंडियों में 10 से 40 रुपए प्रति क्विंटल तक का सुधार आया मगर डबरा में यह 40 रुपए गिरकर 2520/2560 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। इंदौर और देवास में कोई हलचल नहीं हुई। 
राजस्थान 
राजस्थान के कोटा में गेहूं की अच्छी मांग रही जिससे इसका भाव 40 रुपए बढ़कर 2430/2640 रुपए प्रति क्विंटल हो गया। बूंदी में भी 10 रुपए का सुधर देखा गया। 
उत्तर प्रदेश 
उत्तर प्रदेश की मंडियों सामान्य कारोबार के बीच गेहूं के दाम ने 10-20 रुपए प्रति क्विंटल का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। गोरखपुर मंडी में 8-10 हजार बोरी गेहूं की दैनिक आपूर्ति हुई मगर इसका दाम 20 रुपए फिसलकर 2460 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। 
स्टॉक / बिक्री  
ऐसा प्रतीत होता है कि देश के इस सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य में किसानों ने अपने गेहूं का स्टॉक बचाकर रखा हुआ है ताकि आपूर्ति के ऑफ सीजन में ऊंचे दाम पर इसकी बिक्री की जा सके। वहां 30 लाख टन के नियत लक्ष्य के सापेक्ष केवल 10.27 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद संभव हो सकी। 
पंजाब-हरियाणा  
जबकि पंजाब- हरियाणा के फ्लोर मिलर्स को भी वहां गेहूं खरीदने में ज्यादा सफलता नहीं मिली। लेकिन सरकार के पास कुल मिलाकर गेहूं का अच्छा स्टॉक मौजूद है जिससे वह बाजार मूल्य में आने वाली तेजी को नियंत्रित कर सकती है।