साप्ताहिक समीक्षा-जीरा
28-Dec-2024 08:10 PM
जीरा बिजाई के अंतिम आंकड़ों का इंतजार : निर्यात एवं लोकल व्यापार कम
नई दिल्ली । चालू सप्ताह के दौरान जीरा बाजार में लोकल एवं निर्यात व्यापार कम रहा। सूत्रों का कहना है कि क्रिसमस एवं नववर्ष के कारण निर्यात मांग नहीं आ रही है। छिटपुट निर्यात हो रहा है। लोकल में भी उठाव सीमित है। जिस कारण से जीरे के भाव अपने पूर्व स्तर पर दबे रहे। वायदा में भी भाव नरमी के साथ बोले गए। चालू सप्ताह के दौरान जनवरी माह का जीरा 24210 रुपए खुलने के पश्चात सप्ताह के अंत में 23950 रुपए पर बंद हुआ। जबकि मार्च का जीरा 23830 रुपए खुलने के पश्चात 23110 रुपए पर बंद हुआ है। उत्पादक केन्द्रों की मंडियों सहित खपत केन्द्रों पर भी जीरे के दाम 100/200 रुपए मंदा-तेजी के साथ बोले गए।
बिजाई
जानकार सूत्रों का कहना है कि उत्पादक केन्द्रों पर बिजाई का कार्य पूर्ण हो गया है। जल्द ही बिजाई के सरकारी आंकड़े आने वाले हैं। हालांकि व्यापारिक वर्ग सरकारी आंकड़ों से सहमत नहीं है। व्यापारियों का मानना है कि इस वर्ष गुजरात में जीरा बिजाई का क्षेत्रफल 20/30 प्रतिशत तक घटेगा। जबकि राजस्थान में बिजाई का एरिया गत वर्ष के बराबर माना जा रहा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2023 को छोड़कर अगर बीते वर्षों में देखा जाए तो आमतौर पर जीरे के दाम 125/150 रुपए प्रति किलो के बीच ही चलते थे। जबकि वर्तमान में भाव 210/240 रुपए प्रति किलो चल रहे हैं। जोकि किसानों के लिए अच्छा भाव है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 के लिए उत्पादक राज्यों में जीरे की बिजाई 12.64 लाख हेक्टेयर पर की गई थी जोकि एक रिकॉर्ड बिजाई थी। वर्ष 2023 में बिजाई 7.73 लाख हेक्टेयर पर रही थी। बाजार सूत्रों का कहना है कि चालू सीजन के दौरान गुजरात में जीरा बिजाई का क्षेत्रफल लगभग 4 लाख हेक्टेयर के आसपास हो सकता है जबकि गत वर्ष बिजाई 5.21 लाख हेक्टेयर पर की गई थी। राजस्थान में बिजाई लगभग 7/7.25 लाख हेक्टेयर पर किए जाने की संभावना है।
आवक में विलम्ब
उल्लेखनीय है कि चालू सीजन के दौरान उत्पादक राज्यों में देर तक तापमान अधिक रहने के कारण जीरा बिजाई में 20/25 दिन का विलम्ब हुआ है। जिस कारण से आने वाली फसल भी आगामी सीजन में देर से आएगी। आमतौर पर फरवरी माह में नए मालों की आवक गुजरात की मंडियों में बढ़ने लगती थी लेकिन इस वर्ष मार्च माह में आवक बढ़ेगी। जबकि राजस्थान में आवक अप्रैल माह में शुरू होगी।
उत्पादन रहेगा कम
बिजाई क्षेत्रफल में गिरावट आने के कारण आगामी सीजन के लिए जीरा का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम रहेगा। गत वर्ष देश में जीरे की पैदावार 1/1.10 करोड़ बोरी (प्रत्येक बोरी 55 किलो) की रही थी जबकि वर्ष 2023 में उत्पादन 55/60 लाख बोरी रहा था। सूत्रों का मानना है कि वर्तमान में उत्पादन केन्द्रों की मंडियों पर जीरा का स्टॉक 25/30 लाख बोरी माना जा रहा है जोकि नई फसल आने तक 15/20 लाख बोरी के आसपास रहेगा। अगर आगामी दिनों में मौसम ने फसल का साथ दिया तो 2025 में जीरे की पैदावार 75/80 लाख बोरी के आसपास होने की संभावना है।
अधिक मंदा नहीं
जीरे की वर्तमान कीमतों में अधिक मंदा संभव नहीं है लेकिन बकाया स्टॉक अधिक होने के कारण कीमतों में अधिक तेजी की संभावना नहीं है। सूत्रों का मानना है कि आगामी दिनों में नई फसल आने तक जीरा कीमतों में 5/8 रुपए का मंदा-तेजी चलता रहेगा। वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों पर जीरे के भाव 220/240 रुपए प्रति किलो चल रहे हैं। जबकि निर्यात का भाव 4810 रुपए प्रति 20 किलो बोला जा रहा है। मगर व्यापार कम है। जनवरी माह में निर्यात मांग बढ़ने की संभावना है।
निर्यात अधिक
चालू सीजन के दौरान देश में जीरे की रिकॉर्ड पैदावार होने के कारण जीरे की कीमतों में मंदा रहा। भाव घटने के कारण निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 के प्रथम छह माह अप्रैल-सितम्बर - 2024 में जीरे का निर्यात 128505 टन का किया गया है जबकि वर्ष 2023 के अप्रैल-सितम्बर में निर्यात 76969.88 टन का रहा था। गत वर्ष भाव ऊंचे होने के कारण जीरे का बुरी तरह प्रभावित रहा। और वर्ष 2023-24 (अप्रैल-मार्च) के दौरान 165269 टन जीरे का निर्यात किया गया।
