साप्ताहिक समीक्षा-लालमिर्च
15-Feb-2025 07:55 PM
लालमिर्च में मंदे की संभावना नहीं : निर्यात मांग अच्छी
नई दिल्ली। चालू सप्ताह के दौरान उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर निर्यातकों की अच्छी मांग बनी रहने के कारण लालमिर्च के भाव पूर्व स्तर पर मजबूती के साथ बोले गए। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में चीन, बांग्ला देश की बराबर लिवाली चल रही है। इसके अलावा लोकल स्टॉकिस्टों की खरीद भी अच्छी है। नए मालों की आवक का दबाव बनने के कारण वर्तमान में मंडियों में लालमिर्च के भाव न्यूनतम स्तर पर बोले जाने लगे हैं। गुंटूर मंडी में तेजा क्वालिटी का भाव 137/138 रुपए एवं खम्मम में 139/140 रुपए के स्तर पर आ गया है। गत वर्ष इसी समयावधि में गुंटूर मंडी में लालमिर्च तेजा का भाव 202/205 रुपए एवं खम्मम में 208/210 रुपए प्रति किलो बोला जा रहा था। व्यापारियों का कहना है कि रमजान की मांग समाप्त होने के पश्चात कीमतों में 3/5 रुपए की मंदी आ सकती है। इससे अधिक मन्दा संभव नहीं है।
उत्पादन
उत्पादक केन्द्रों से मिली जानकारी के अनुसार गत वर्ष आंध्र प्रदेश में लालमिर्च का उत्पादन लगभग 2 करोड़ बोरी के आसपास रहा था जोकि इस वर्ष डेढ़ करोड़ बोरी होने की संभवाना है। तेलंगाना में भी उत्पादन गत वर्ष के 75/80 लाख बोरी के मुकाबले 55/60 लाख बोरी उत्पादन माना जा रहा है। हालांकि उत्पादन कम है। लेकिन बकाया स्टॉक पर्याप्त है। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में गुंटूर नदी में लालमिर्च का स्टॉक 25/26 लाख बोरी होने के समाचार है जबकि गत वर्ष इसी समयावधि में स्टॉक 12/14 लाख बोरी का था। तेलंगाना में स्टॉक गत वर्ष के 7/8 लाख बोरी के मुकाबले 12/15 लाख बोरी माना जा रहा है।
आवक
वर्तमान में मंडियों में नए लालमिर्च की आवक जोरो पर है। गुंटूर मंडी में आवक 1 लाख बोरी के आसपास चल रही है। जबकि हैदराबाद मंडी में आवक 8/9 हजार बोरी की हो रही। खम्मम मंडी में आवक 60/70 हजार बोरी की हो रही है। वारंगल में आवक 25/30 हजार बोरी की चल रही है। सूत्रों का मानना है कि आवक का दबाव फरवरी माह तक रहेगा। मार्च माह में अब तक घटनी शुरू हो जाएगी। क्योंकि भाव नीचे होने के कारण किसान माल रोकना शुरू कर देगा।
मन्दा-तेजी
व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में रमजान की अच्छी मांग चल रही है। जिस कारण से कीमतों में मजबूती बनी हुई है लेकिन हाल-फिलहाल कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है। नए मालों की आवक घटने के पश्चात कीमतों में सुधार संभव है जोकि अप्रैल माह में बन सकता है। वर्तमान में मंडियों में भाव गत वर्ष की तुलना में 60/70 रुपए प्रति किलो नीचे चल रहा है। किसान अपनी आवश्यकतापूर्ति के लिए बिकवाली कर रहा है। आगामी दिनों में भाव बढ़ने के इंतजार में माल रोकने की कोशिश करेगा। सूत्रों का मानना है कि वर्तमान भावों में मंदे के लिए 3/5 रुपए घट सकते है जबकि जहां तक तेजी का सवाल जून-जुलाई माह तक कीमतों में 20/25 प्रति किलो की तेजी आने की व्यापारिक धारणा है।
निर्यात अधिक
चालू वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के प्रथम आठ माह में लालमिर्च के निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-नवम्बर - 2024 के दौरान लाल मिर्च का निर्यात 377778.29 टन का हुआ है। और निर्यात से प्राप्त आय 6162.30 करोड़ की हुई है। जबकि गत वर्ष अप्रैल-नवम्बर - 2023 में लालमिर्च का निर्यात 342890.46 टन का हुआ और प्राप्त आय 7050.25 करोड़ की रही। भाव नीचे होने के कारण एक ओर जहां निर्यात में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई वही कुल प्राप्त आय में 13 प्रतिशत की गिरावट आई है। वर्ष 2023-24 के दौरान लालमिर्च का निर्यात 601084 टन का रहा था। अभी तक के निर्यात प्रदर्शन को देखते हुए संभावना व्यक्त की जा रही है कि चालू सीजन में लालमिर्च का निर्यात गत वर्ष की तुलना में अधिक रहेगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020-21 के दौरान लालमिर्च का रिकॉर्ड निर्यात 649815 टन का हुआ था।
