साप्ताहिक समीक्षा- मूंगफली
05-Jul-2025 06:33 PM
कमजोर कारोबार के साथ मूंगफली की कीमतों में नरमी
नई दिल्ली। हालांकि प्रमुख उत्पादक मंडियों में 28 जून से 4 जुलाई वाले सप्ताह के दौरान मूंगफली की सामान्य आवक हुई मगर व्यापारिक मांग कमजोर रहने से इसके दाम में 50-100 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई।
गुजरात
गुजरात की राजकोट मंडी में इसकी आवक 600 बोरी से बढ़ते हुए 2 जुलाई को 9 हजार बोरी पर पहुंच गई मगर बाद में घटकर 5-6 हजार बोरी रह गई। वहां इसका भाव 6500/7500 रुपए प्रति क्विंटल पर स्थिर रहा।
राजस्थान
राजस्थान के जोधपुर में भी कीमत 6500/6600 रुपए प्रति क्विंटल के पुराने स्तर पर कायम रहा मगर बीकानेर में 50 रूपए नरम पड़कर 5200 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया। इसी तरह महाराष्ट्र के सोलापुर में कमजोर कारोबार के कारण मूंगफली का भाव 100 रुपए गिरकर 6700 रुपए प्रति क्विंटल रह गया।
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश की मंडियों में मिश्रित रुख रहा। वहां झांसी में भाव 4200/4800 रुपए प्रति क्विंटल के पिछले स्तर पर बरकरार रहा और इसकी आवक 1750/2250 बोरी के बीच हुई लेकिन महोबा मंडी में 550-1100 बोरी की दैनिक आवक के बीच मूंगफली का दाम 100 रुपए गिरकर 4700/5000 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया। दूसरी ओर मऊरानीपुर में सीमित आवक होने से भाव 25 रुपए सुधरकर 4600/4875 रुपए पर पहुंच गया।
मूंगफली दाना
छिलका रहित मूंगफली के दाने में बीकानेर में अच्छा कारोबार हुआ जिससे 50/60 काउंट वाले दाने का भाव 300 रुपए तथा 60/70 काउंट वाले का दाम 500 रुपए बढ़कर 8600 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गया अन्य केन्द्रों में विभिन्न काउंट वाले दाने की कीमतों में स्थिरता बनी रही।
मूंगफली तेल
लूज (बल्क) रूप में मूंगफली तेल की मांग कुछ बेहतर देखी गई जिससे गुजरात के राजकोट गोंडल, जूनागढ़ एवं जामनगर में इसका भाव 25 रुपए सुधरकर 1375 रुपए प्रति 10 किलो हो गया। इसी तरह राजकोट में 15 किलो वाले तेलिया टीन का दाम 40 रुपए की वृद्धि के साथ 2205 रुपए पर पहुंच गया। अन्य केन्द्रों पर भी उसके दाम में कुछ सुधार दर्ज किया गया।
ब्रांडेड तेल
लेकिन राजस्थान के कोटा में ब्रांडेड मूंगफली तेल का मूल्य 2350 रुपए प्रति टीन (15 किलो) के पूर्व स्तर पर बरकरार रहा। फिल्टर्ड मूंगफली तेल की कीमतों में 10 से 25 रुपए प्रति 10 किलो तक की बढ़ोत्तरी हुई। खाद्य तेल-तिलहन बाजार में कारोबार सामान्य देखी जा रही है। मूंगफली की खरीफ फसल के लिए बिजाई पहले ही आरंभ हो चुकी है और सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त गुजरात में इसका रकबा बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
