साप्ताहिक समीक्षा-सरसों

12-Apr-2025 07:30 PM

मंडियों में घटती आवक के बीच सरसों की कीमतों में सुधार
 
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में सरसों की आवक घटते जाने, सरकारी एजेंसियों की खरीद जोर पकड़ने तथा व्यापारियों एवं मिलर्स की लिवाली होने से 5-11 अप्रैल वाले सप्ताह के दौरान सरसों की कीमतों में अच्छी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। 
42% कंडीशन सरसों 
42 प्रतिशत कंडीशन वाली सरसों का दाम दिल्ली में 200 रुपए बढ़कर 6300 रुपए प्रति क्विंटल तथा जयपुर में 150 रुपए सुधरकर 6425/6450 रुपए प्रति क्विंटल हो गया। इसी तरह सामान्य औसत क्वालिटी वाली सरसों का भाव गुजरात के डीसा एवं धनेरा मंडी में 200-200 रुपए तथा राजस्थान की बूंदी मंडी में 500 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ। उत्तर प्रदेश की हापुड़ मंडी में सरसों का भाव 100 रुपए सुधरकर 6400 रुपए तथा आगरा मंडी में 175 रुपए बढ़कर 6700/6950 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। 
आवक 
घरेलू मंडियों में 5 अप्रैल को 10.50 लाख बोरी की आवक हुई थी जो 7 अप्रैल को गिरकर 9.50 लाख बोरी, 8 अप्रैल को घटकर 8 लाख बोरी तथा 10 अप्रैल को लुढ़ककर 5 लाख बोरी रह गई। 11 अप्रैल को भी 6.25 लाख बोरी सरसों की ही आपूर्ति हुई। प्रत्येक बोरी 50 किलो की होती है। 
सरकारी खरीद 
प्रमुख उत्पादक राज्यों में सरसों की सरकारी खरीद आरंभ हो गई है मगर इसकी गति अभी धीमी है। सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस बार 5950 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित हुआ है और महत्वपूर्ण मंडियों में इसका भाव समर्थन मूल्य के आसपास पहुंच गया है। कीमतों में तेजी आने का एक कारण यह है कि इस बार सरसों की क्वालिटी काफी अच्छी है। इसमें नमी का अंश कम तथा तेल की मात्रा ज्यादा है। किअं सीमित मात्रा में अपना स्टॉक उतार रहे हैं जबकि मिलर्स की मांग मजबूत बनी हुई है। राजस्थान के अलवर में 10 हजार बोरी एवं खैरथल में 15 हजार बोरी सरसों की दैनिक आवक हुई।
सरसों तेल 
सरसों तेल के दाम में भी 15 से 25 रुपए प्रति 10 किलो तक की वृद्धि हुई। एक्सपेलर का भाव दिल्ली में 15 रुपए सुधरकर 1300 रुपए तथा मुम्बई में 45 रुपए उछलकर 1335 रुपए प्रति 10 किलो पर पहुंचा। लेकिन बीकानेर में यह 30 रुपए गिरकर 1270 रुपए पर आ गया। 
सरसों खल (डीओसी)  
चीन में भारतीय रेपसीड मील (सरसों डीओसी) की जोरदार मांग निकलने लगी है क्योंकि उसने कनाडाई कैनोला एवं इसके उत्पादों पर 100 प्रतिशत का भारी-भरकम आयात शुल्क लगा दिया है। चीन बहुत बड़ा बाजार है और वहां भारत से निर्यात बढ़ने पर कीमतों में तेजी आ सकती है।