साप्ताहिक समीक्षा-सोयाबीन
28-Jun-2025 07:38 PM
मिलर्स की कमजोर लिवाली से सोयाबीन का भाव नरम
नई दिल्ली। क्रशिंग-प्रोसेसिंग इकाइयों द्वारा सीमित मात्रा में सोयाबीन की खरीद की जा रही है सोया डीओसी का भाव नरम पड़ गया है।
प्लांट भाव
21-27 जून के सप्ताह में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं राजस्थान जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में सोयाबीन के प्लांट डिलीवरी मूल्य में 25 से 100 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई। सोयाबीन का भाव पहले से ही 4892 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी पीछे चल रहा था जबकि चालू सप्ताह में यह कुछ और घट गया।
खरीद
सरकारी एजेंसी ने 2024-25 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान किसानों से रिकॉर्ड मात्रा में सोयाबीन की खरीद की थी और अब इस स्टॉक को वापस बाजार में उतारना शुरू कर दिया है। इससे कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है और किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
बिजाई
इस बीच देश में सोयाबीन की बिजाई आरंभ हो गई है लेकिन शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि इसकी खेती में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण कुछ घट सकता है। यह स्थिति अच्छी नहीं मानी जा सकती। सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अच्छी वृद्धि की गई है लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि किसान इससे ज्यादा प्रभावित नहीं है।
गिरावट
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान सोया रिफाइंड तेल के दाम में भी 10 से 35 रुपए प्रति 10 किलो तक की गिरावट दर्ज की गई। विदेशों से क्रूड डिगम्ड सोयाबीन तेल के बड़े पैमाने पर आयात हो रहा है। आपूर्तिकर्ता देशों में इसका भाव कुछ तेज हुआ है जिससे भारतीय बंदरगाहों पर आयातित खाद्य तेल की पहुंच का खर्च 3 से 5 प्रतिशत तक बढ़ा है मगर सीमा शुल्क पहले की अपेक्षा काफी कम लगता है।
सोया तेल (रिफाइंड)
सोया रिफाइंड तेल कोटा में 25 रुपए घटकर 1190 रुपए प्रति 10 किलो, मुम्बई में 100 रुपए लुढ़ककर 1150 रुपए प्रति 10 किलो तथा कांडला एवं हल्दिया में 15-15 रुपए गिरकर क्रमश: 1160 रुपए एवं 1155 रुपए प्रति 10 किलो पर आ गया।
आवक
प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में 23 जून को 2.10 लाख बोरी सोयाबीन की आवक हुई थी जो 24 जून को गिरकर 2.00 लाख बोरी एवं 26 जून को घटकर 1.70 लाख बोरी रह गई। प्रत्येक बोरी 100 किलो की होती है।
सोया खल (डीओसी)
सोया डीओसी के दाम में मिश्रित रूख देखा गया लेकिन आमतौर पर गिरावट ही रही। इसका निर्यात ऑफर मूल्य घट गया है जिससे मिलर्स की आमदनी प्रभावित हो रही है और उसे ऊंचे दाम पर किसानों से सोयाबीन खरीदने का समुचित प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है।
