साप्ताहिक समीक्षा-धान-चावल
15-Feb-2025 08:16 PM
सामान्य कारोबार के बीच धान-चावल के मूल्य में सीमित उतार-चढ़ाव
नई दिल्ली। खरीफ कालीन सामान्य श्रेणी के धान की आवक अधिकांश मंडियों में बंद हो चुकी है और अब 'ए' ग्रेड तथा बासमती धान की आपूर्ति ही मुख्य रूप से हो रही है। 8-14 फरवरी वाले सप्ताह के दौरान धान की खरीद में मिलर्स-प्रोसेसर्स एवं निर्यातकों की दिलचस्पी रही इसलिए कीमतों में भी 100-200 रुपए प्रति क्विंटल की सीमित तेजी-मंदी दर्ज की गई। दिल्ली की नरेला मंडी में धान की भारी आवक हो रही है।
दिल्ली
नरेला मंडी में पहले 10-15 हजार बोरी धान की दैनिक आवक हो रही थी जो 13 फरवरी को बढ़कर 40 हजार बोरी पर पहुंची अगर 14 फरवरी को घटकर 20 हजार बोरी रह गई। इस मंडी में 1509 हैण्ड, 1718 तथा 1847 धान का भाव 25-50 रुपए नरम और ताज का दाम 25 रुपए तेज रहा। नजफगढ़ मंडी में 1500/2500 बोरी की दैनिक आवक के साथ धान के दाम में नरमी का माहौल रहा। वहां 1121 का भाव 90 रुपए एवं 1718 का मूल्य 130 रुपए प्रति क्विंटल नरम रहा।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के भाटापाड़ा एवं राजिम में धान की आवक काफी घट गई है इसलिए सुस्त कारोबार के साथ भाव लगभग स्थिर देखा जा रहा है। पंजाब के अमृतसर, फाजिल्का एवं तरन तारन में धान की आवक नहीं या नगण्य हो रही है।
उत्तर प्रदेश
लेकिन उत्तर प्रदेश की मंडियों- एटा मैनपुरी, अलीगढ़, शाहजहांपुर, जहांगीराबाद तथा खैर से धान आ रहा है। वहां इसकी कीमतों में सप्ताह के दौरान आमतौर पर नरमी का ही माहौल देखा गया। केवल डिबई में 1509 धान का भाव 150 रुपए बढ़कर 2850 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा।
हरियाणा
हरियाणा के तरावड़ी में 1121 धान की कीमत 100 रुपए की नरमी के साथ 3900 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गई। मंडी में 2-3 हजार बोरी धान की दैनिक आवक हुई।
राजस्थान
राजस्थान के बूंदी में 40-50 हजार बोरी धान की रोजाना आवक हुई जबकि इसके अनुरूप उठाव नहीं होने से भाव 100-200 रुपए प्रति क्विंटल घट गया। कोटा मंडी में तो धान की दैनिक आवक बढ़कर 13 फरवरी को 70-80 हजार बोरी पर पहुंच गई।
चावल
जहां तक चावल का सवाल है तो इसका कारोबार भी सप्ताह के दौरान सुस्त ही रहा जिससे कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव नहीं आया दरअसल मिलर्स एवं निर्यातक चावल की विदेशी मांग का इंतजार कर रहे हैं। बासमती चावल में भारत को अग्रता हासिल है लेकिन पाकिस्तान का मिडिया इसके बारे में भ्रामक प्रचार कर रहा है जिससे कुछ आयातक असमंजस की स्थिति में फंस गए हैं। गैर बासमती चावल का निर्यात सामान्य ढंग से जारी है लेकिन इसमें भी प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।
