सरकारी गेहूं की बिक्री का लचर प्रदर्शन जारी
20-Feb-2026 10:56 AM
नई दिल्ली। खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अनर्गत भारतीय खाद्य निर्यात (एफसीआई) द्वारा आयोजित साप्ताहिक ई-नीलामी में सरकारी गेहूं की बिक्री का लचर या फीका प्रदर्शन जारी है। फ्लोर मिलर्स एवं प्रोसेसर्स इसकी खरीद में बहुत कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
खाद्य निगम को उम्मीद थी कि गेहूं उत्पादों के निर्यात का कोटा 5 लाख टन से बढ़ाकर 10 लाख टन निर्धारित होने के बाद गेहूं की बिक्री में इजाफा होगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका। खाद्य निगम के पास गेहूं का विशाल स्टॉक मौजूद है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 18 फरवरी को आयोजित नीलामी के तहत खाद्य निगम द्वारा 1.40 लाख टन गेहूं की बिक्री का ऑफर दिया गया जबकि वास्तविक बिक्री महज 61,440 टन या 44 प्रतिशत की ही हो सकी। इससे पिछले सप्ताह में भी केवल 50 प्रतिशत गेहूं बेचा जा सका था।
महत्वपूर्ण बात यह है कि पहले उत्तर प्रदेश के मिलर्स / प्रोसेसर्स सरकारी गेहूं की खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे थे मगर 18 फरवरी की नीलामी से वे लगभग दूर ही रहे। केवल एक फ्लोर मिलर ने ही इसमें भाग लिया।
आमतौर पर गेहूं की सरकारी खरीद का नया मार्केटिंग सीजन औपचारिक तौर पर 1 अप्रैल से आरंभ होता है लेकिन कुछ राज्यों में अगैती बिजाई वाली फसल की आवक एवं खरीद मार्च के तीसरे-चौथे सप्ताह में ही शुरू हो जाती है। बम्पर उत्पादन की संभावना को देखते हुए मिलर्स / प्रोसेसर्स सीमित मात्रा में सरकारी गेहूं की खरीद कर रहे हैं।
18 फरवरी को आयोजित नीलामी में उत्तर प्रदेश में 10,500 टन गेहूं का ऑफर दिया गया था मगर केवल 1 मिलर ने नीलामी में भाग लिया और कुल ऑफर के लिए सिर्फ 1 प्रतिशत भाग की खरीद की जबकि 99 प्रतिशत ऑफर अनबिका रह गया। खुले बाजार में गेहूं सरकारी माल से कम दाम पर उपलब्ध है और इसकी आपूर्ति भी सुगमता से हो रही है।
