संसदीय पैनल द्वारा ऑर्गेनिक फसलों के लिए अलग एमएसपी का सुझाव

24-Jul-2025 08:42 PM

नई दिल्ली। संसद की अनुमान समिती ने देश में स्थायी एवं नियमित कृषि प्रणाली को मुख्य धारा में शामिल करने हेतु एक विस्तृत एवं प्रमाण आधारित रोड मैप तैयार किया है जिसमें कृषि विज्ञान केन्द्रों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया गया।

इसके साथ-साथ समिति ने सरकार को प्राकृतिक एवं ऑर्गेनिक कृषि प्रणाली को आर्थिक दृष्टि से उत्पादकों के लिए लाभदायक बनाने का समुचित उपाय करने का सुझाव भी दिया है। यह उपाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से वैध होना चाहिए ताकि किसानों को इसे बड़े पैमाने पर अपनाने का पर्याप्त प्रोत्साहन मिल सके। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट में समिति कई अन्य सुझावों की सिफारिश भी की है जिसमें चुनिंदा ऑर्गेनिक फसलों के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का निर्धारण करना और कृषि विज्ञान केन्द्रों को उसके प्रदर्शन के आधार पर दर्जा (रैंक) देने की प्रक्रिया पुनः आरंभ करना भी सम्मिलित है। 

समिति का कहना है कि सामान्य कृषि फसलों की तुलना में आर्गेनिक उत्पादों का एमएसपी ऊंचा होना चाहिए। फिलहाल इसका दाम भी 20-30 प्रतिशत ऊंचा रहता है और इसलिए इसे वैधानिक बनाया जाना चाहिए। यदि ऑर्गेनिक फसलों के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण किया जाएगा तो किसानों को आगामी कीमतों के लिए एक मजबूत आधार प्राप्त होगा और इसकी खेती के प्रति उसका  उत्साह एवं आकर्षण बढ़ जाएगा। 

ऑर्गेनिक खेती के रास्ते में अनेक चुनौतियां भी हैं जिसे दूर किया जाना जरुरी हैं। एक तो श्रमिकों की मजदूरी दर ऊंची रहती है। खेती के लिए जगह की तलाश में कठिनाई होती है और दूसरे, बाजार तक पहुंच बनाना मुश्किल होता है।

इसके आलावा आवश्यक आर्गेनिक साधनों और खासकर जैव उर्वरक का अभाव भी रहता है। दरअसल खेती में अब रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता जरूरत से ज्यादा बढ़ गई है इसलिए बायो फर्टिलाइजर का उपयोग बहुत कम हो रहा है।