सोया तेल से आगे निकल सकता है पाम तेल का आयात
28-Jul-2025 12:42 PM
मुम्बई। हालांकि हाल के महीनों में पाम तेल की तुलना में सोयाबीन तेल का आयात अधिक तेजी से बढ़ा है लेकिन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के कार्यकारी निदेशक का मानना है कि इस स्थिति में जल्दी ही परिवर्तन हो सकता है।
2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) की दूसरी छमाही में पाम तेल का आयात सोयाबीन तेल से ज्यादा तेज गति से बढ़ेगा क्योंकि यह एक बार फिर सस्ता हो गया है।
कार्यकारी निदेशक के अनुसार भारतीय उत्पादकों ने भारी मात्रा में पाम तेल खरीदना शुरू कर दिया है क्योंकि आपूर्तिकर्ता देशों में इसका पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और इसका आयात खर्च कम बैठ रहा है।
पहले भारत में 60 प्रतिशत पाम तेल एवं 40 प्रतिशत सॉफ्ट तेल का आयात हो रहा था मगर हाल के महीनों में यह अनुमान बढ़कर 50-50 प्रतिशत पर आ गया क्योंकि नवम्बर 2024 से अप्रैल 2025 की छमाही के दौरान पाम तेल का भाव ऊंचा चल रहा था।
लेकिन बाद में यह कुछ नरम पड़ गया। भारत के लिए पाम तेल बहुत महत्वपूर्ण है और इसके बगैर काम नहीं चल सकता है। भारत को प्रति वर्ष लगभग 80 लाख टन पाम तेल की जरूरत पड़ती है और यही एक मात्र ऐसा खाद्य तेल है जिसका आयात इतनी विशाल मात्रा में किया जा सकता है। सोयाबीन तेल या सूरजमुखी तेल इसे पूरी तरह विस्थापित नहीं कर सकता है।
एसोसिशन का मानना है कि आगामी महीनों के दौरान क्रूड खाद्य तेलों का आयात तेजी से बढ़ सकता है क्योंकि अगस्त नवम्बर तक देश में त्यौहारी सीजन रहेगा। दूसरी ओर मार्केटिंग सीजन की दूसरी छमाही के दौरान स्वदेशी स्रोतों से खाद्य तेल की आपूर्ति भी कम होती है। इसके फलस्वरूप पहली छमाही के मुकाबले दूसरी छमाही में खाद्य तेलों का आयात ज्यादा होता है।
कार्यकारी निदेशक के मुताबिक कुल मिलाकर चालू मार्केटिंग सीजन में खाद्य तेलों का आयात पिछले सीजन से कुछ कम होने की संभावना है क्योंकि पिछले खरीफ सीजन के दौरान देश में सोयाबीन एवं मूंगफली का शानदार उत्पादन हुआ और इसकी अच्छी मात्रा में क्रशिंग-प्रोसेसिंग भी हो रही है।
