शुल्क कटौती पर सहमति के बाद चीन और अमरीका के बीच व्यापार सामान्य होने के आसार
14-May-2025 07:55 PM
शंघाई। अमरीका और चीन के बीच भयंकर टैरिफ वार चल रहा था जिससे दोनों देशों का आयात निर्यात बुरी तरह प्रभावित होने लगा था और राजस्व में भी कमी आने लगी थी। चीन आयातकों ने अमरीका से सोयाबीन, मक्का एवं गेहूं मंगाना बंद कर दिया था। उसके फसलस्वरूप चीन में अप्रैल 2025 के दौरान सोयाबीन का कुल आयात घटकर पिछले 10 साल के निचले स्तर पर अटक गया।
दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था वाले देश- अमरीका और चीन के बीच टैरिफ के मुद्दे पर जेनेवा में बातचीत हुई और दोनों ने अस्थायी रूप से सीमा शुल्क की दर में भारी कटौती करने पर सहमति जताई।
इसके तहत अमरीका ने चीन के सामानों पर आयात शुल्क को 145 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत नियत करने का निर्णय लिया जबकि चीन ने अमरीकी उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क को 125 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत पर लाने का फैसला किया। इस आशय का एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा गया कि 14 मई तक यह निर्णय लागू हो जाएगा।
जानकारों का कहना है कि अमरीका के राष्ट्रपति को इस हकीकत का अहसास हो गया कि टैरिफ वार के जरिए चीन पर दबाव डालना अब मुश्किल है क्योंकि तमाम अमरीकी उत्पादों के लिए चीन के पास बेहतर विकल्प मौजूद हैं।
उदाहरणस्वरूप वह ब्राजील से सोयाबीन, ऑस्ट्रेलिया एवं रूस से गेहूं तथा ब्राजील, अर्जेन्टीना एवं यूक्रेन से मक्का का भारी आयात कर सकता है। मटर और मसूर के लिए रूस तथा ऑस्ट्रेलिया का विकल्प उसके पास मौजूद है।
शुल्क संघर्ष से पूर्व अमरीका से सोयाबीन का सर्वाधिक निर्यात चीन को हो रहा था और वह अमरीकी मक्का का भी एक प्रमुख खरीदार बना हुआ था।
चीन भी अमरीकी बाजार के हाथ से निकलने के कारण काफी परेशान था क्योंकि उन उत्पादों के लिए वैकल्पिक बाजार की तलाश करना आसान काम नहीं है जिसका निर्यात अमरीका को बड़े पैमाने पर किया जा रहा था।
दोनों देशों को एक-दूसरे की सख्त जरूरत है। व्यावसायिक सोच वाले अमरीकी राष्ट्रपति को जल्दी ही अपनी भूल का आभास हो गया और चीन के साथ शुल्क कटौती पर सहमति बन गई।
तीन माह का समय सीमा शुल्क पर पुनर्विचार के लिए दिया गया है और इस बीच दोनों देश आपसी बातचीत के जरिए स्थायी समाधान निकालने का प्रयास कर सकते हैं।
