शानदार उत्पादन एवं बेहतर सरकारी खरीद के कारण गेहूं पर स्टॉक सीमा लगने की संभावना क्षीण

08-May-2025 01:53 PM

नई दिल्ली। चालू वर्ष के दौरान देश में गेहूं का शानदार या रिकॉर्ड उत्पादन होने से सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ व्यापारियों / स्टॉकिस्टों एवं मिलर्स / प्रोसेसर्स को भी इसकी भरपूर खरीद करने का अवसर मिल रहा है।

घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम रहने तथा कीमतों में ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं होने से सरकार को गेहूं पर भंडारण सीमा (स्टॉक लिमिट) लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

गेहूं की सरकारी खरीद 280 लाख टन से ऊपर पहुंच चुकी है और खरीद की प्रक्रिया अभी जारी है। यह मात्रा पिछले नियत संशोधित लक्ष्य 332.70 लाख टन का करीब 84 प्रतिशत है।

गेहूं की कुल सरकारी खरीद यदि 300 लाख टन या उससे ऊपर पहुंचती है तो पिछले बकाया स्टॉक के साथ इसकी कुल उपलब्धता 400 लाख टन से ज्यादा हो जाएगी।

एक खास बात यह है कि इस बार प्राइवेट खरीदारों को किसानों से गेहूं की भारी खरीद करने में  सफलता मिल रही है जिससे आगामी महीनों के दौरान घरेलू बाजार में इसकी कमी नहीं रहनी चाहिए।

गेहूं पर भंडारण सीमा को पहले ही 31 मार्च 2025 को समाप्त किया जा चुका है लेकिन सरकारी पोर्टल पर प्रत्येक शुक्रवार को स्टॉक की जानकारी देना आवश्यक है। प्राप्त सूचना के मुताबिक फरवरी पोर्टल पर अब तक गेहूं का जो स्टॉक अपलोड किया गया है वह पिछले साल से 6-7 लाख टन ज्यादा है।

खुले बाजार में भी गेहूं का भारी-भरकम स्टॉक उपलब्ध होने का अनुमान है जबकि बड़े-बड़े उत्पादकों के पास गेहूं का अच्छा खासा स्टॉक बताया जा रहा है। 

पिछले दो वर्षों से सरकार गेहूं पर स्टॉक सीमा लागू करके घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने तथा कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही थी लेकिन चालू वर्ष के दौरान शायद भंडारण सीमा लागू करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

प्रमुख उत्पादक प्रांतों में सरकारी एजेंसियों एवं प्राइवेट फर्मों की शानदार खरीद को देखने से स्पष्ट पता चलता है कि इस वर्ष देश में गेहूं का बम्पर उत्पादन हुआ है जिससे इसके अभाव का संकट दूर हो जाएगा।

आई ग्रेन इंडिया का मानना है कि खुले बाजार में बेहतर उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए सरकार इस बार खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं की बिक्री करने में जल्दबाजी नहीं दिखाएगी।