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07-Oct-2026 07:41 PM
नई दिल्ली। हालांकि पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन तथा अरंडी के बिजाई क्षेत्र में गिरावट आ गई लेकिन तिल और सूरजमुखी का रकबा बढ़ने तथा मूंगफली का क्षेत्रफल स्थिर रहने से तिलहन फसलों के कुल उत्पादन क्षेत्र में एक लाख हेक्टेयर से अधिक की बढ़ोत्तरी हो गई।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 123.30 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 123.20 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। अरंडी के रकबे में इससे ज्यादा गिरावट आई। मूंगफली का बिजाई 51 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष के बराबर हो रहा।
दूसरी ओर सूरजमुखी का रकबा 84 प्रतिशत उछलकर 1.29 लाख हेक्टेयर तथा तिल का क्षेत्रफल 14 प्रतिशत बढ़कर 11 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंच गया। खरीफ कालीन तिलहन फसलों की बिजाई समाप्त हो चुकी है और अब इसकी कटाई-तैयारी का समय आ गया है।
मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र सोयाबीन का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है मगर वहां लगभग 80 प्रतिशत भाग में जबरदस्त सूखा पड़ने से फसल की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। यही स्थिति कर्नाटक में भी देखी जा रही है।
वैसे मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में सोयाबीन फसल की हालत सामान्य बताई जा रही है। गुजरात एवं तेलंगाना में भी फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। कुल मिलाकर खरीफ कालीन तिलहनों का ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। कुल मिलाकर खरीफ कालीन तिलहनों का सकल उत्पादन पिछले साल से कम होने की संभावना है।