तुवर की आपूर्ति एवं उपलब्धता में सुधार आने के आसार
16-May-2025 05:57 PM
मुम्बई। बेहतर घरेलू उत्पादन तथा विदेशों से ऊंचे आयात के सहारे चालू वर्ष के दौरान अरहर (तुवर) की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी हद तक सुगम रहने के आसार हैं। खरीफ सीजन की इस सबसे महत्वपूर्ण दलहन फसल की बिजाई अगले महीने (जून) से आरंभ होने वाली है।
पहले इसका बाजार भाव काफी ऊंचा चल रहा था मगर अब घटकर 7550 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास या उससे कुछ नीचे आ गया है।
सरकरी एजेंसियां किसानों से इसकी खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखा रही हैं। जल्दी ही केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा आगामी मार्केटिंग सीजन के लिए अन्य खरीफ फसलों के साथ तुवर के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा किए जाने की उम्मीद है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2024-25 के सीजन की शुरुआत में देश के अंदर 7.20 लाख टन तुवर का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद था जबकि सीजन के दौरान 38 लाख टन के घरेलू उत्पादन तथा 12 लाख टन के आयात के साथ इसकी कुल उपलब्धता बढ़कर 57.20 लाख टन पर पहुंचने की उम्मीद है।
इसमें से 45 लाख टन का उपयोग घरेलू प्रभाग में होने की संभावना है जबकि 20 हजार टन का विदेशों में निर्यात हो सकता है। इसके फलस्वरूप सीजन के अंत में 12 लाख टन तुवर का बकाया स्टॉक मौजूद रहेगा जो 2025-26 सीजन के दौरान उपलब्धता बढ़ाने में सहायक साबित होगा।
हालांकि 2025-26 के सीजन में तुवर का घरेलू उत्पादन 2 लाख टन घटकर 36 लाख टन पर अटक जाने का अनुमान है लेकिन 12 लाख टन के बकाया अधिशेष स्टॉक तथा 11.20 लाख टन के संभावित आयात के साथ इस महत्वपूर्ण दलहन की कुल उपलब्धता बढ़कर 59.20 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच जाने की उम्मीद है।
इसमें से 47 लाख टन का घरेलू उपयोग तथा 50 हजार टन का निर्यात हो सकता है और सीजन के अंत में 11.70 लाख टन का अधिशेष स्टॉक बचने के आसार हैं।
तुवर के प्रमुख उत्पादक राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात एवं उत्तर प्रदेश आदि शामिल हैं। भारत में तुवर का आयात म्यांमार तथा अफ्रीकी देशों से किया जाता है।
इस बार म्यांमार में अच्छा उत्पादन हुआ है और इसकी नई फसल आ रही है। अफ्रीकी देशों में तुवर की बिजाई समाप्त हो चुकी है और अगस्त-सितम्बर से फसल की कटाई-तैयारी जोर पकड़ने लगेगी।
