तुवर की कीमतों में भारी गिरावट, पिछले साल से मुकाबले

05-Jul-2025 01:25 PM

तुवर की कीमतों में भारी गिरावट, पिछले साल से मुकाबले
★ सभी मंडियों में तुवर की कीमतों में बीते एक साल में भारी गिरावट दर्ज की गई है। 5 जुलाई 2024 को जहां तुअर की कीमतें 12,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर थीं, वहीं अब यही दाम घटकर 6,000 से 7,000 रुपये के बीच आ गए हैं। बोली गई कीमतों में 5,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट ने किसानों, व्यापारियों और मिलर्स को संकट में डाल दिया है।
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ताजा भाव और गिरावट (5 जुलाई 2025) के अनुसार (पिछले वर्ष के मुकाबले):
सोलापुर: ₹6,850 (गिरावट  ₹5,400)
अकोला: ₹6,950 (गिरावट ₹5,250)
मुंबई लेमन: ₹6,300 (गिरावट ₹4,950)
बीदर: ₹6,925 (गिरावट ₹5,386)
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गिरावट की वजह
1. बड़े पैमाने पर आयात
★ 2024-25 में भारत ने 12.23 लाख टन तुवर आयात की, जबकि 2023-24 में यह आंकड़ा 7.71 लाख टन और 2022-23 में 8.95 लाख टन  था। यानी पिछले साल की तुलना में लगभग 60% ज्यादा आयात हुआ, जिसने घरेलू बाजार पर सीधा दबाव डाला।
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2. अफ्रीका और म्यांमार में बढ़ता उत्पादन
★ अफ्रीका और म्यांमार में तुवर उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। म्यांमार के निर्यातक सितंबर से पहले स्टॉक खाली करने के लिए डिस्काउंट पर बिक्री कर रहे हैं, ताकि अफ्रीकी तुवर के आने से पहले अधिक से अधिक निर्यात हो सके। 
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3. घरेलू किसान और व्यापारी घाटे में
★ जहां अंतरराष्ट्रीय किसान और निर्यातक मुनाफा कमा रहे हैं, वहीं भारतीय किसान, ट्रेडर्स और प्रोसेसर्स को भारी नुकसान हो रहा है। सरकार ने आयात की अनुमति 31 मार्च 2026 तक दी है, जिससे यह संकट अभी और गहराने की आशंका है।
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★ भाव टूटने के कारण कई राज्यों में किसान तुवर की बुवाई घटाने का मन बना रहे हैं। इसकी जगह मक्का, गन्ना और अन्य नकदी फसलों की ओर झुकाव बढ़ रहा है।
★ यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है।
★ किसानों की आय प्रभावित होगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और आत्मनिर्भरता का लक्ष्य और दूर होता जाएगा।
★ हालाँकि अफ्रीकन तुवर आने से पहले मांग निकल सकती है जो कीमतों को मामूली समर्थन दे सकती है।