थोक मंडी भाव नरम पड़ने से चना की सरकारी खरीद बढ़ने के आसार
30-Apr-2025 10:49 AM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार की दो अधीनस्थ एजेंसी- भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नैफेड) तथा भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) को कुछ समय पूर्व तक बफर स्टॉक के लिए किसानों से चना की खरीद में भारी कठिनाई हो रही थी
लेकिन अब नए माल की जोरदार आवक होने तथा मांग कमजोर पड़ने से इसका थोक मंडी भाव घटकर प्रमुख उत्पादक राज्यों और खासकर कर्नाटक, महाराष्ट्र एवं राजस्थान में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास या उससे नीचे आ गया है
जिससे रबी सीजन के इस सबसे महत्वपूर्ण दलहन की सरकारी खरीद की गति तेज होने की प्रबल संभावना है। मध्य प्रदेश एवं गुजरात की मंडियों में भी नरमी आने के संकेत मिल रहे हैं।
चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2023-24 सीजन के 5440 रुपए प्रति क्विंटल से 210 रुपए बढ़ाकर 2024-25 सीजन के लिए 5650 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है।
29 अप्रैल को कर्नाटक की प्रमुख मंडियों में इसका मॉडल मूल्य 5000 से 6130 रुपए प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किया गया।
इसका दाम गुलबर्गा में 5450/5730 रुपए प्रति क्विंटल, बीदर में 5070/5890 रुपए, रायचूर में 5000/5700 रुपए, गडग में 5640/5885 रुपए तथा हुबली में 5850/6130 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।
इसी तरह महाराष्ट्र की विभिन्न मंडियों में चना का भाव नीचे में 5000 रुपए से लेकर ऊपर में 6100 रुपए प्रति क्विंटल के बीच रहा। लातूर में भाव एमएसपी से ऊपर यानी 5750/6100 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है जबकि खामगांव में 5500/5650 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।
राजस्थान की मंडियों में भी चना का मॉडल मूल्य घटकर एमएसपी से काफी नीचे आ गया है। वहां इसका दाम पिछले दिन जोधपुर में 4800/5250 रुपए प्रति क्विंटल, किशनगढ़ में 5200/5320 रुपए, केकड़ी में 5200/5300 रुपए तथा कोटा में 5000/5325 रुपए प्रति क्विंटल रहा। सुमेरपुर में चना का दाम 5200/5225 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।
हालांकि कर्नाटक एवं महाराष्ट्र की मंडियों में नए चने की आवक बहुत पहले शुरू हो गई थी मगर थोक मंडी भाव एमएसपी से ऊपर होने के कारण सरकार को इसकी खरीद में ज्यादा सफलता नहीं मिल सकी।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों में कुल मिलाकर लगभग 28 लाख टन चना की खरीद की स्वीकृति प्रदान की है और इस लक्ष्य को हासिल करने की भरपूर कोशिश भी की जा रही है। अब कीमतों में नरमी आने से चना की सरकारी खरीद की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।
