दक्षिणी राज्यों में खरीफ फसलों की बिजाई की गति सामान्य

25-Jul-2025 11:55 AM

नई दिल्ली। देश के दक्षिणी प्रांतों और खासकर तेलंगाना आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक में मानसून की वर्षा इस बार अनियमित एवं अनिश्चित रही है जिससे खरीफ फसलों की बिजाई की गति सामान्य देखी जा रही है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान तेलंगाना में खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र 23 जुलाई तक 66.33 लाख एकड़ से बढ़कर 76.28 लाख एकड़ पर पहुंचा मगर आंध्र प्रदेश में 10.25 लाख हेक्टेयर से गिरकर 10.04 लाख हेक्टेयर रह गया। कर्नाटक में 11 जुलाई तक खरीफ फसलों का बिजाई क्षेत्र 54.58 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 54.69 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा था। तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश में कपास का रकबा वर्षा से आगे चल रहा है। 

कर्नाटक में तुवर का उत्पादन क्षेत्र 11.25 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 13.35 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया मगर उड़द का क्षेत्रफल 91 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 88 हजार हेक्टेयर तथा मूंग का रकबा 4.08 लाख हेक्टेयर से गिरकर 3.99 लाख हेक्टेयर पर अटक गया था।

कर्नाटक में मक्का एवं कपास की बिजाई गत वर्ष से पीछे चल रही थी जबकि सोयाबीन का क्षेत्रफल 25 हजार हेक्टेयर आगे हो गया था। वहां गन्ना के क्षेत्रफल में 55 हजार हेक्टेयर की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। 

जहां तक तेलंगाना का सवाल है तो वहां पिछले साल के मुकाबले वर्तमान खरीफ सीजन में धान, मक्का, तुवर एवं कपास के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन उड़द, मूंग एवं सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र पीछे चल रहा है।

आंध्र प्रदेश में वर्षा का भारी अभाव महसूस किया जा रहा है जिससे वहां खरीफ सीजन के दौरान आंध्र प्रदेश में वर्षा का भारी अभाव महसूस किया जा रहा है जिससे वहां खरीफ फसलों की बिजाई की रफ्तार कुछ धीमी है।

हालांकि पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन के दौरान आंध्र प्रदेश में धान, मक्का एवं कपास के बिजाई क्षेत्र में इजाफा हुआ है लेकिन तुवर एवं मूंगफली का रकबा घट गया है। 

इन तीनों प्रांतों के मुकाबले तमिलनाडु और केरल में वर्षा की स्थिति काफी अच्छी है जिससे वहां किसानों को विभिन्न फसलों की खेती करने में सुविधा हो रही है। केरल में धान का सामान्य उत्पादन होता है जबकि तमिलनाडु में धान के साथ-साथ मोटे अनाज, दलहन-तिलहन एवं गन्ना की भी अच्छी खेती होती है।