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दक्षिणी राज्यों में लौटते मानसून से वर्षा

01-Oct-2026 11:16 AM

दक्षिणी राज्यों में लौटते मानसून से वर्षा

तिरुअनन्तपुरम। दक्षिण-पश्चिम मानसून का पश्चिमोत्तर भारत से वापस लौटना पहले ही आरंभ हो चुका है और अब यह देश के उत्तरी तथा मध्यवर्ती भाग से होते हुए दक्षिण भारत पहुंचेगा। मौसम विभाग ने 15 अक्टूबर तक देश से इस मानसून के पूरी तरह प्रस्थान कर जाने का अनुमान व्यक्त किया है। इस बीच आज यानी 1 अक्टूबर 2026 से औपचारिक तौर पर उत्तर-पूर्व मानसून का समय शुरू हो गया है मगर इसकी सक्रियता बढ़ने में कुछ वक्त लग सकता है।

दक्षिण भारत में इस बार मानसून काफी कमजोर रहा जिससे वहां दीर्घकालीन औसत के मुकाबले बारिश कम हुई। इससे खरीफ फसलों की बिजाई घट गई। इसके तहत खासकर धान के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट आई। अब कर्नाटक, तमिलनाडु एवं केरल जैसे राज्यों में वर्षा का नया दौर आरंभ हुआ है जिससे खरीफ फसलों को कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन सूखे की वजह से खरीफ फसलों को पहले से भारी नुकसान हो चुका है उसकी पूरी भरपाई होनी मुश्किल है। दिलचस्प तथ्य यह है कि कम बारिश के बावजूद आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में दलहन-तिलहन फसलों की बिजाई बढ़ गई। इसके तहत खासकर तुवर एवं उड़द के रकबे में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है। 

उत्तर-पूर्व मानसून के ज्यादा वर्षा दक्षिण भारत में होती है मगर इस बार अल नीनो मोसम चक्र की तीव्रता एवं ताकत बढ़ने से मानसून की वर्षा पर असर पड़ने की संभावना है। दक्षिणी राज्यों के बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक भी कम बचा है। कर्नाटक में अनेक तहसीलों को सूखा ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। महाराष्ट्र के कुछ भागों में भी सूखे का गंभीर प्रकोप है।