दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत मध्य प्रदेश को सर्वाधिक केन्द्रीय सहायता

07-May-2026 01:16 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश को 2442.04 करोड़ रुपए का विशाल अनुदान स्वीकृत करते हुए दलहनों के उत्पादन संवर्धन का बड़ा लक्ष्य भी दिया है। इस धनराशि से मध्य प्रदेश सरकार को राज्य के सभी 55 जिलों में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिभर्रता मिशन को प्रभावी ढंग से लागू एवं संचालित करने में सहायता मिलेगी। यह मिशन अगले पांच साल के लिए होगा और इसके अंतर्गत मध्य प्रदेश में दलहनों का उत्पादन बढ़ाने का सबसे बड़ा लक्ष्य रखा गया है।

इस मिशन के तहत मध्य प्रदेश में दलहनों की उन्नत एवं विकसित प्रजातियों के बीज का 2 लाख 22 हजार 700 किट किसानों के बीच वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। वितरण की समय सीमा एक साल नियत की गई है। यह आंकड़ा देश के अन्य राज्यों से बड़ा है। दूसरे नम्बर पर उत्तर प्रदेश है जहां 2.11 लाख किट में दलहनों के बीज का वितरण किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के 56 जिलों में किसानों को यह बीज उपलब्ध करवाया जाएगा।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि मध्य प्रदेश भारत का सबसे प्रमुख दलहन उत्पादक राज्य है जहां चना, तुवर, उड़द, मूंग एवं मसूर की पैदावार बड़े पैमाने पर होती है। दलहनों के कुल राष्ट्रीय उत्पादन में अकेले मध्य प्रदेश का योगदान 24 प्रतिशत के करीब रहता है। केन्द्र अब इस राज्य को 'ग्लोबल पल्स हब' बनाने की योजना बना रहा है इसलिए प्रान्त के सभी 55 जिलों में दाल मिल एवं प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित करने का प्लान है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तुवर, उड़द एवं मसूर की शत-प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करने की गारंटी पहले ही दी जा चुकी है। मध्य प्रदेश में उड़द की खरीद पर 600 रुपए प्रति क्विंटल के अतिरिक्त बोनस की घोषणा हो चुकी है जबकि अब मसूर पर बोनस देने का प्लान बनाया जा रहा है। इसके साथ-साथ दलहनों पर मंडी शुल्क में छूट देने पर भी विचार हो रहा है। 

देश में करीब 40 प्रतिशत चना का उत्पादन सिर्फ मध्य प्रदेश में होता है। वहां विदिशा, रायसेन एवं होशंगाबाद इसके  प्रमुख उत्पादक केन्द्र हैं। मध्य प्रदेश उड़द एवं मसूर का भी सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है। वहां 4.50-5.10 लाख हेक्टेयर में तुवर की खेती होती है जिसे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।