दलहनों के दाम में आगे भारी गिरावट आने की संभावना कम

07-May-2026 06:15 PM

मुम्बई। दलहनों के बाजार पर अभी जारी दबाव देखा जा रहा है। सभी प्रमुख दलहनों का थोक मंडी भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे आ गया है। निकट भविष्य में कीमतों में ज्यादा तेजी आना तो मुश्किल लगता है मगर जोरदार गिरावट आने की संभावना भी बहुत कम है। यदि बाजार में नरमी आती है तो भी काफी सीमित हो सकती है। कीमतों पर अधिकांश नकारात्मक कारकों का प्रभाव पहले ही पड़ चुका है। आगामी समय में कुछ सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। 

दरअसल प्राइवेट व्यापारियों आयातकों के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों के पास भी दलहनों का भारी-भरकम स्टॉक मौजूद है। भविष्य में सरकारी स्टॉक खुले बाजार में उतारा जा सकता है। पिछले तीन वर्षों के दौरान देश में दलहनों का विशाल आयात हुआ जिससे आपूर्तिकर्ता देशों को भारी फायदा हुआ।

घरेलू प्रभाग में भी दाल-दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी सुगम हो गई। लेकिन अब आयातकों की सक्रियता कमजोर पड़ गई है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान दलहनों के आयात में काफी कमी आई। इससे वैश्विक बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया और आपूर्तिकर्ता देशों को नीचे दाम पर अपने दलहनों का स्टॉक बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है। 

भारत में तुवर एवं उड़द का आयात तो पूरी तरह शुल्क मुक्त है जबकि देसी चना एवं मसूर पर 10-10 प्रतिशत तथा पीली मटर पर 30 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान दलहन कारोबारियों को काफी घाटा उठाना पड़ा। छोटे एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों को ज्यादा वित्तीय नुकसान होने से कारोबार में उसकी दिलचस्पी एवं सक्रियता कम हो गई और अब वे काफी सावधानी से कारोबार चलाने का प्रयास कर रहे हैं।

केवल तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ही इसकी खरीद हो रही है जबकि बाजार में माल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। फिलहाल दलहनों के अभाव का कोई संकेत नहीं मिल रहा है इसलिए कहीं कोई जल्दबाजी नहीं दिख रही है। मौजूदा स्थिति कुछ समय तक बरकरार रह सकती है और उसके बाद बाजार में मजबूती का माहौल बन सकता है। इसमें मानसून का योगदान भी रहेगा।