दलहन कारोबार में स्थिरता एवं प्रगति के लिए भारत और ब्राजील के बीच दीर्घकालीन करार पर जोर

14-Feb-2025 04:33 PM

साओ पाउलो । ब्राजीलियन बीन्स एवं दलहन संस्थान (इब्राफे) के निदेशक ने दलहन कारोबार में स्थिरता एवं प्रगति को सुनिश्चित करने के लिए भारत और ब्राजील के बीच दीर्घकालीन व्यापारिक समझौता किये जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

उल्लेखनीय है कि ब्राजील ने पिछले साल भारत को करीब 70 हजार टन उड़द का निर्यात किया था और उसके साथ ही वह म्यांमार के बाद भारत को उड़द की आपूर्ति करने वाला दूसरा सबसे प्रमुख देश बन गया।

इस अतिरिक्त आपूर्ति से भारत को दोहरा फायदा हुआ। एक तो घरेलू प्रभाग में इस दलहन की उपलब्धता बढ़ाने में सहायता मिली और दूसरे, म्यांमार के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उड़द की कीमतों में भी कुछ कमी आ गई। वैसे म्यांमार की तुलना में ब्राजील से आयात बहुत कम हुआ।

निदेशक के अनुसार पक्की संधि के अभाव में ब्राजील के किसानों को दीर्घ कालीन कारोबार का ठोस आश्वासन प्राप्त नहीं हो रहा है इसलिए वे उड़द का बिजाई क्षेत्र और उत्पादन बढ़ाने से हिचक रहे हैं क्योंकि इससे आर्थिक जोखिम बढ़ने की आशंका है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि ब्राजील का इरादा म्यांमार को विस्थापित करके भारत के लिए उड़द का सबसे बड़ा आपूर्ति देश बनने  का नहीं है लेकिन अगर भारत स्थायी वैकल्पिक स्रोत की तलाश में है तो ब्राजील इसमें मददगार साबित हो सकता है।

लेकिन इसके लिए ब्राजील के किसानों को यह ठोस आश्वासन देना आवश्यक है कि उसके उत्पाद की पूरी खरीद की जाएगी और उन्हें लाभप्रद मूल्य भी प्राप्त होगा। भारत में दलहनों की तेजी से बढ़ती मांग एवं खपत को पूरा करने में ब्राजील सहायता कर सकता है। 

द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के लिए संस्थान ब्राजील में दलहनों का उत्पादन बढ़ाने में सक्रिय है और भारतीय बाजार की ओर इसका ज्यादा ध्यान केन्द्रित है।

निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए ब्राजील में कृषि उत्पादन में विविधता पर जोर दिया जा रहा है। वह दुनिया में सोयाबीन तथा गन्ना (चीनी) का सबसे प्रमुख तथा मक्का का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बना हुआ है मगर वहां दलहनों का उत्पादन बहुत कम होता है। अब इस पर ध्यान देने का प्रयास किया जा रहा है।